बूचड़खानों की बंदी के खिलाफ प्रदर्शन करते मीट विक्रेता
सूबे की योगी सरकार द्वारा बूचड़खानों पर एक्शन के बाद से मीट विक्रेताओं में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। सोमवार को कानपुर के मीट विक्रेताओं ने सरकार की इस कार्रवाई पर अपना कड़ा विरोध जताया। मीट विक्रेताओं ने प्रदर्शन कर वधशालाओं को दोबारा खोलने की मांग की।
मीट विक्रेताओं का कहना है कि गलत ढंग से स्लाटर हाउसोंं की बंदी की जा रही है। इससे कई परिवारों के सामने रोजी रोटी का संकट बढ़ गया है। एक सप्ताह होने को है लेकिन सरकार ने अभी तक मीट विक्रेताओं के बारे में कुछ नहीं सोचा। यही हालात चलते रहे तो कई परिवार भूखों मरने को मजबूर हो जाएंगे। जो स्लाटर हाउस अवैध हैं उन्हें बंद कर दिया जाए लेकिन जो अनुमति लेकर चल रहे हैं कम से कम उन्हें खोल दिया जाए।
सोमवार को तंजीम बरादरान-ए-कुरैशी की ओर से एक बैठक संगठन के अध्यक्ष हाजी कल्लन साहब की अध्यक्षता में हुई। बैठक में प्रदेश सरकार के हलाल भेड़-बकरी बूचड़खाना बकरमंडी को अवैध घोषित कर बंद करने व गोश्त बेचने वाले दुकानदारों की दुकानें पुलिस प्रशासन के बंद कराने पर आक्रोश व्यक्त किया गया। संगठन के महामंत्री मो. कुरैशी ने कहा कि शासन के इस निर्णय से प्रदेश भर में कुरैशी बिरादरी के लाखों लोग बेरोजगार हो गए।
जिलाधिकारी से मांग की कि वैध बूचड़खानों को तुरंत चालू कराया जाए। उन्होंने शासन के इस कदम को संविधान के ‘राइट फार फूड, प्रोटेक्शन एंड शेल्टर’ का हनन बताया। मांग की कि बकरमंडी में कैंप लगाकर गोश्त बेचने वाले दुकानदारों के लाइसेंस का नवीनीकरण किए जाए। साथ ही बकरमंडी स्लाटर हाउस का जीर्णोद्घार तुरंत कराने की मांग की। इस दौरान फजल अहमद, निसार अहमद, शमशाद अहमद, नौशाद अहमद, इरशाद अहमद, मो. साबिर आदि उपस्थित रहे।
Uttar Pradesh: Meat sellers in Kanpur protest against government's move to shut down illegal slaughterhouses. pic.twitter.com/OosCZDFYyy
— ANI UP (@ANINewsUP) March 27, 2017