इत्र नगरी कन्नौज में बसपा सुप्रीमो मायावती की सोशल इंजीनियरिंग फेल हो गई। मायावती का छिबरामऊ में कास्ट कार्ड भी नहीं चला। यहां पर मतदाताओं ने जातिगत आधार पर वोट मांगने वालों को सबक सिखाया है।
छिबरामऊ में मुस्लिम प्रत्याशी उतारकर बसपा ने मुस्लिम मतदाताओं को समेटने का मन बनाया था लेकिन बसपा की यह मंशा सफल नहीं हो सकी। वहीं, तिर्वा में विजय विद्रोही को टिकट देकर सभी वर्गों के वोटों को बटोरने की मंशा भी फेल हो गई।
कन्नौज सदर में युवा अनुराग जाटव को टिकट दिया था। पहली बार चुनावी मैदान में उतरे अनुराग जाटव को 44 हजार 30 मत मिले। ये मत साल 2012 के चुनाव में बसपा प्रत्याशी रहे महेंद्र कुमार को मिले 50 हजार 20 से कम हैं। जिससे साफ है कि बसपा का ग्राफ यहां भी गिरा।