डकोर विकास खंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम टीकर और कुशमिलिया में भीषण आग ने ऐसा कहर बरपाया कि देखते ही देखते करीब 15 घर इसकी चपेट में आ गए। आग इतनी भयावह थी कि घरों के भीतर रखा सारा घरेलू सामान, अनाज और जमापूंजी जलकर पूरी तरह खाक हो गई। इस भीषण अग्निकांड के बाद कई गरीब परिवार दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं और खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
रात में सो रहा था परिवार, अचानक उठने लगीं लपटें
मिली जानकारी के अनुसार, घटना की शुरुआत ग्राम टीकर से हुई। यहां के निवासी शिवकुमार रोजाना की तरह रात में अपने परिवार के साथ घर के अंदर सो रहे थे। इसी दौरान अज्ञात कारणों से उनके घर में आग लग गई। घर से अचानक धुआं और ऊंची-ऊंची लपटें उठती देख मोहल्ले के लोग सन्न रह गए। ग्रामीणों ने तुरंत शोर मचाना शुरू किया और सो रहे परिवार को जगाकर समय रहते घर से बाहर निकाला। जब तक शिवकुमार का परिवार संभल पाता, तब तक आग ने विकराल रूप धारण कर लिया था।
तेज हवाओं ने सुलगती आग को बनाया 'काल', 15 घरों को निगला
गर्मी के मौसम में चल रही तेज हवाओं ने आग में घी का काम किया। देखते ही देखते लपटें एक घर से दूसरे घर में फैलने लगीं और उसने पास के ही कुशमिलिया गांव के घरों को भी अपनी चपेट में ले लिया। इस भीषण तांडव में दोनों गांवों के करीब 15 आशियाने जलकर जमींदोज हो गए। हादसे के बाद गांव में चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने बिना वक्त गंवाए बाल्टियों, निजी सबमर्सिबल और पानी के टैंकरों की मदद से खुद ही आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू किया।
फायर ब्रिगेड ने कड़ी मशक्कत के बाद पाया काबू, सब कुछ खाक
घटना की सूचना तत्काल दमकल विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां अमले के साथ मौके पर पहुंचीं। ग्रामीणों और दमकलकर्मियों की भारी मशक्कत के बाद आखिरकार आग पर काबू पाया जा सका, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पीड़ितों के घरों में रखा कपड़ा, बिस्तर, सालभर का अनाज, घरेलू सामान, नकदी और जरूरी कागजात तक जलकर राख के ढेर में तब्दील हो चुके थे।
खुले आसमान के नीचे पीड़ित, आर्थिक मदद की गुहार
आग की इस विनाशकारी घटना ने कई हंसते-खेलते परिवारों को सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया है। पीड़ितों के पास अब न तो पहनने को कपड़े बचे हैं और न ही खाने को निवाला। घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में मातम का माहौल है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि बेघर हुए इन प्रभावित परिवारों को तत्काल रहने के लिए तिरपाल, खाने के लिए राशन और उचित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।