तीन पन्नों का सुसाइड नोट... जिसमें कहीं पति से माफी, मां-बाप की चिंता तो कहीं भाई की शादी की फिक्र और हर लिखे शब्दों में असहनीय दर्द की टीस। रावतपुर थानाक्षेत्र के सुरेंद्र नगर में जहरीला पदार्थ खाकर जान देने वाली वैष्णवी तिवारी उर्फ निक्की (26) का सुसाइड नोट जिसने पढ़ा उसके आंखों में आंसू आ गए। वैष्णवी ने लिखा कि उनका भी सपना था एक सामान्य और खुशहाल जीवन जीने का लेकिन रीढ़ की हड्डी में गांठ और लगातार बढ़ते दर्द ने उनके सारे सपने छीन लिए।
दर्द और जकड़न के बावजूद वह हमेशा मुस्कुराती रही ताकि परिवार उनकी वजह से परेशान न हो। मगर जब हर सांस के साथ उठने वाला दर्द उनकी हिम्मत से बड़ा हो गया तो उन्होंने जान दे दी। सुरेंद्र नगर निवासी शिवम शुक्ला रेलवे ग्रुप डी में भोपाल में तैनात हैं। शिवम ने पुलिस को बताया कि वर्ष 2023 में कानपुर देहात के असालतगंज निवासी वैष्णवी तिवारी उर्फ निक्की से शादी हुई थी।
शादी से पहले थी ये दिक्क्त
वैष्णवी को शादी से पहले रीढ़ की हड्डी में गांठ थी जिसका इलाज चल रहा था। वैष्णवी को पूरी तरह से फायदा नहीं हो रहा था। बताया कि वैष्णवी ने हाल ही में दिल्ली पुलिस कांस्टेबल की लिखित परीक्षा पास की थी। कुछ दिनों बाद उनका मेडिकल होना था लेकिन पीठ में असहनीय पीड़ा के कारण वह मानसिक तनाव में थीं।
रुंधे गले से पति ने कही ये बात
पति ने बताया कि वह पत्नी को सरप्राइज देने के लिए बुधवार सुबह पांच बजे भोपाल से घर पहुंचे जहां कमरे में पत्नी बेहोश पड़ी थी। अस्पताल लेकर पहुंचे जहां डॉक्टर ने पत्नी को मृत घोषित कर दिया। रुंधे गले से पति ने बताया कि बीमारी के चलते उन लोगों ने बच्चे नहीं किए।
रावतपुर इंस्पेक्टर कमलेश राय ने बताया कि विवाहिता ने तीन पन्नों का सुसाइड नोट लिखकर जान दी है। वह रीढ़ में गांठ की बीमारी के दर्द से परेशान थीं। पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने जांच कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
मैं किसी पर बोझ नहीं बनना चाहती...
वैष्णवी ने सुसाइड नोट में यह भी लिखा कि मेरी बीमारी ऐसी है कि हम खुशी से नहीं रह पाएंगे। अब 24 घंटे दर्द रहता है। हर सांस के साथ तकलीफ होती है। एक दिन ऐसा आएगा कि मैं बिस्तर पकड़ लूंगी। मुझे उठाने-बिठाने और खिलाने के लिए लोगों की जरूरत पड़ेगी। मैं किसी पर बोझ नहीं बनना चाहती। लिखा कि पतिदेव मुझे माफ कर देना। मुझे मुक्ति मिल गई।
वहीं माता-पिता से लिखा कि उनके जाने के बाद टूटना नहीं बल्कि सोचना कि उन्हें असहनीय दर्द से छुटकारा मिल गया। लिखा कि मेरे लिए कोई रोएगा नहीं... आप सबकी लाडली, दुलारी और प्यारी... निक्की।