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नक्शे की वजह से नहीं रुकेगा निर्माण

Thu, 14 Jul 2016 01:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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प्रॉपर्टी, फ्लैट, हाउस - फोटो : डेमो फोटो
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कानपुर। यदि उप्र राज्य औद्योगिक विकास निगम (यूपीएसआईडीसी) में आवेदन के छह माह बाद भी नक्शे को स्वीकृति नहीं मिलती है तो इसे ‘डीम्ड’ स्वीकृत माना जाएगा। आवंटी अपनी इकाई पर निर्माण करा सकेगा।
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  निगम की बुधवार को लखनऊ में हुई 291वीं बोर्ड बैठक में यह फैसला लिया गया। निगम अध्यक्ष आलोक रंजन की अध्यक्षता में हुई निदेशक मंडल की बैठक में 250 एकड़ जमीन लेने पर ढाई अरब और 1668 एकड़ औद्योगिक क्षेत्रों के विकास पर नौ अरब रुपये खर्च करने को मंजूरी मिली। लखनऊ और गाजियाबाद में निर्माणाधीन मेट्रो प्रोजेक्ट को 12 करोड़ रुपये देने पर भी सहमति बनी। 845.87 एकड़ जमीन के आवंटन से 1188 करोड़ रुपये की आय का लक्ष्य है। निगम के एमडी मनोज सिंह ने बताया कि बैठक में सरस्वती हाईटेक सिटी, नैनी, इलाहाबाद में विभिन्न श्रेणी वाले आवासीय भूखंडों की योजना जल्द लांच की जाएगी।  इसके लिए तैयार की गई नियम व शर्तों की पुस्तिका बैठक में अनुमोदन के लिए रखी गई। बैठक में वित्तीय वर्ष 2016-17 की कार्ययोजना भी पेश की गई है। प्रदेश में अब तक 16350 वृहद, मध्यम और लघु औद्योगिक इकाइयों की स्थापना की गई है।  इससे 11.25 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है।
इन योजनाओं में होगा विकास
एमडी के मुताबिक चालू वित्तीय वर्ष में 900 करोड़ से ट्रांस गंगा-उन्नाव, सरस्वती हाईटेक सिटी, नैनी औद्योगिक क्षेत्र, कोसी कटवन विस्तार, कन्नौज, ट्रोनिका सिटी विस्तार (ट्रांस दिल्ली, सिग्नेचर सिटी) प्रदर्शनी केंद्र अमौसी आदि प्रोजेक्ट में विकास कराए जाएंगे।
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स्थलीय निरीक्षण शुरू करेंगे रंजन
लखनऊ। मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार आलोक रंजन ने कहा कि वह जल्दी ही ट्रांसगंगा सिटी परियोजना व सरस्वती हाईटेक सिटी परियोजना में विकसित की जा रही अवस्थापना सुविधाओं का स्थलीय निरीक्षण करेंगे। उन्होंने आवंटित भूमि पर उद्यमी द्वारा यथाशीघ्र उद्योग स्थापित करने के लिए आकर्षक कार्य योजना बनाने का निर्देश दिया। रंजन ने एक अन्य अहम निर्देश में कहा कि निगम द्वारा आवंटित भूखंड में यदि गड्ढे हों, तालाब की स्थिति हो या फिर ऐसी स्थिति हो जहां पर इकाई लगाना संभव न हो, तो ऐसे भूखंडों को निरस्त कर आवंटी को दूसरा भूखंड आवंटित किया जाए। रंजन ने निगम के अधिकारियों को निर्देशित किया कि उद्यमियों को प्रदेश में उद्योग फ्रेंडली वातावरण का अहसास कराने के लिए निवेशकों को हर संभव सहायता दी जाए।
सोलर ऊर्जा के लिए एसपीवी
प्रदेश में लागू सौर ऊर्जा नीति-2013 के लिए निगम की ओर से चयनित औद्योगिक क्षेत्रों के उद्यमियों की खाली जमीन उपलब्ध कराने और निवेश के लिए आकर्षित करने का प्रस्ताव रखा गया। यूपी नेडा ने प्रति मेेगावाट बिजली उत्पादन के लिए 1.5 हेक्टेयर जमीन की जरूरत बताई है। इसके लिए बुंदेलखंड और पूर्वी क्षेत्रों में निगम क्षेत्रों में उपलब्ध जमीन के चिह्नित कर स्पेशल परपज व्हीकल (एसपीवी) के जरिए सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की योजना है। इन परियोजनाओं के लिए निगम की प्रवर्तित कंपनी मेसर्स यूपीएसआईडीसी पावर कंपनी लिमिटेड को एसपीवी के रूप में प्रयोग किए जाने पर भी मंजूरी मिली।
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