बंशी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन बिठूर ने ज्यादा से ज्यादा एससी स्टूडेंट्स को एडमिशन देकर सरकारी फीस (शुल्क प्रतिपूर्ति) हड़पने का खेल किया है। प्रमुख सचिव समाज कल्याण सुनील कुमार ने जो जांच कराई है, उसके अनुसार शैक्षिक सत्र 2013-14 में इस ग्रुप के तीन कॉलेजों में ऐसा किया गया है।
सरकारी फीस लेने के बाद कई छात्रों को एग्जाम नहीं दिलवाया गया और उनकी फीस हड़प ली। यही नहीं एक ही छात्र को कई जगह एडमिशन दिलाए गए। इस मामले में पूर्व जिला समाज कल्याण अधिकारी पीसी उपाध्याय की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
मसले को लेकर पूर्व समाज कल्याण अधिकारी हर्ष मवार चार दिन पहले निलंबित किए जा चुके हैं। बंशी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन से संबद्ध तीन इंस्टीट्यूट के सामान्य, ओबीसी, एससी और एसटी स्टूडेंट्स के लिए सत्र 2013-14 में 5.60 करोड़ रुपये से ज्यादा की सरकारी फीस दी गई है।
सबसे ज्यादा एससी स्टूडेंट्स के नाम पर फीस जारी हुई। प्रमुख सचिव की जांच से पता चला है कि बंशी कॉलेज ऑफ एजूकेशन मोहम्मदपुर में 610 एससी स्टूडेंट्स को प्रवेश दिया गया। इसमें 20 फीसदी से ज्यादा स्टूडेंट्स एग्जाम में नहीं शामिल हुए। इस कॉलेज के लिए कुल 2 करोड़ 71 लाख 23 हजार 250 रुपये की सरकारी फीस जारी हुई है।
लाखों रुपये एससी स्टूडेंट्स के नाम पर हड़पे गए। ऐसा ही बंशी कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज बिठूर में हुआ। यहां भी 182 एससी स्टूडेंट्स को एडमिशन दिया गया। ओबीसी के तीन जनरल के एक स्टूडेंट को एडमिशन मिल सका। एसटी का एक भी स्टूडेंट नहीं मिला।
यहां भी एग्जाम देने वाले एससी स्टूडेंट्स की संख्या 20 फीसदी कम बताई गई है। यहां के लिए कुल 1 करोड़ 70 लाख 37 हजार 600 रुपये की सरकारी फीस जारी हुई।
इसी ग्रुप के बंशी कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी में ओबीसी के तीन, जनरल के 14 स्टूडेंट को एडमिशन दिया गया लेकिन एससी कोटे के स्टूडेंट की संख्या 130 रही। इनमें से ज्यादातर की सरकारी फीस दी गई है। इसके बावजूद सभी स्टूडेंट एग्जाम में नहीं शामिल हुए। बिना एग्जाम के ही एडमिशन लेने वाले 20 फीसदी स्टूडेंट का पैसा हजम कर लिया गया।
इन मामलों की जांच प्रमुख सचिव करा रहे हैं। उन्हीं के स्तर से निलंबन और कानूनी कार्रवाई की जानी है। जो भी सूचनाएं शासन ने मांगी थीं, उसे भेज दी गई है। पिछले शैक्षिक सत्रों में दी गई सरकारी फीस की जांच भी शासन करा रहा है।
- अजित प्रताप सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी
एडमिशन और सरकारी फीस लेने की प्रक्रिया पारदर्शी है। कानूनी रूप से किसी तरह की गलती नहीं की गई है। प्रमुख सचिव मामले को जबरदस्ती तूल दे रहे हैं। यूपी के ज्यादातर इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट में एससी के ज्यादा स्टूडेंट के एडमिशन हुए हैं। इनकी फीस भी जारी हुई है।
एग्जाम की उपस्थिति कम है लेकिन प्रमुख सचिव स्तर से कानपुर के छह कॉलेजों को ही टारगेट किया जा रहा है। इसमें तीन बंशी ग्रुप से जुड़े हैं। संस्थान ने किसी तरह की गलती नहीं है। जरूरत पड़ी तो मामले में न्यायपालिका का सहारा लिया जाएगा।
- मयंक अग्निहोत्री, चेयरमैन बंशी ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशन