मनुष्य को 9 लोगों से बैर नहीं लेना चाहिए। इन लोगों से झगड़ा करने पर नुकसान के साथ कभी-कभी जान भी गंवानी पड़ सकती है। यह बात महोबा चकलवंशी कस्बे में चल रही रामकथा के 5वें दिन कथा व्यास पं. कुंजबिहारी त्रिपाठी ने कही। उन्होेंने बताया कि मनुष्य को सरकार में बैठे उच्चाधिकारी से, शस्त्र धारण किए हुए व्यक्ति से, धनवान से, डॉक्टर से, रसोइया से, सठ(कढ़ोर व्यक्ति) से, आवारा मवेशी, स्त्री से, अपने खास मित्र और निजी नौकर से बैर नहीं लेना चाहिए।
नौकर और आपका मित्र आपकी कमजोरी को जानता है। प्रवचन देते हुए कहा कि रावण अपने मामा मारीच से सीता हरण में मायावी हिरण बनने के लिए दबाव बना रहा था। रावण ताकतवर शस्त्र धारण किए हुए और अहंकारी राजा भी था। मारीच ने मन में विचार किया कि प्रभु राम से बैर लेता हूं तब भी मौत और रावण की बात नहीं मानता तो दशानन मार देगा। इससे अच्छा है भगवान राम के हाथों मरने से स्वर्ग मिलेगा। रावण की बात मान कर मारीच सोने का हिरण बनकर राम के हाथों स्वर्ग सिधार गया उसे सद्गति मिल गई। इस मौके पर कथा आयोजक बद्रीनाथ मिश्रा, उनके पिता चंद्रनाथ मिश्रा व नीरज मिश्रा सहित अन्य भक्त मौजूद रहे।