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पोस्टमार्टम के लिए रिक्शे में ले जाना पड़ा शव, स्वास्थ्य मंत्री का भी आदेश नहीं मान रहे अधिकारी

Fri, 25 May 2018 07:35 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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पुलिस लाइन के सामने से रिक्शे में शव को ले जाता चालक - फोटो : अमर उजाला
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यूपी के हमीरपुर जिले में शुक्रवार को एक बार फिर मानवता को शर्मसार होना पड़ा। जिला अस्पताल के मुर्दाघर में रखे शव को पोस्टमार्टम हाउस तक ले जाने के लिए कोई शव वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया। इस पर परिजन व होमगार्ड को शव को रिक्शे में लिटाकर ले जाना पड़ा।  
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मुख्यालय के कजियाना मोहल्ला निवासी आरती (16) ने बुधवार की रात घर में केरोसिन डालकर आग ली थी। झुलसी किशोरी की हालत नाजुक होने पर परिजन उसे इलाज के लिए कानपुर ले गए, जहां उसकी मौत हो गई। 


गुरुवार शाम शव मुख्यालय पहुंचा तो पुलिस ने पंचनामा किया। इसके बाद शव को जिला अस्पताल के मुर्दाघर में रखवा दिया था। शुक्रवार को शव का पोस्टमार्टम होना था। दोपहर करीब 12 बजे आरती के परिजनों के साथ एक होमगार्ड ने सीएमएस डा.राजीव शर्मा से शव वाहन उपलब्ध कराने की बात कही। इस पर उन्होंने कुछ इंतजार करने को कहा। सीएमएस ने बताया कि उन्होंने कहा था कि अभी शव वाहन यहां नहीं है आने पर ही मिलेगा। इसी के कुछ देर बाद होमगार्ड रिक्शे में शव को रखवाकर पोस्टमार्टम हाउस ले गया है।
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11 मई को प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में शव वाहनों की उपलब्धता व संचालन के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की थी। आदेश था कि जरूरतमंदों को शव वाहन मुहैया हर हाल में कराया जाए। आदेश में यह भी कहा गया कि शव वाहन के लिए पर्याप्त बजट है। जिन अस्पतालों में शव वाहन न हों वहां तत्काल खरीदे जाएं। वहीं जिला अस्पताल में मात्र एक शव वाहन है, जबकि यहां महोबा, फतेहपुर, घाटमपुर आदि जिलों से भी लोग आते हैं। 
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