चित्रकूट में मंदाकिनी नदी पर फिर उमड़ेगा आस्था का सैलाब
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पूरे साल में कुल 12 संक्रान्तियां होती हैं, लेकिन इनमें से चार संक्रांति मेष, कर्क, तुला और मकर संक्रांति बहुत महत्वपूर्ण मानी गईं हैं। पौष मास में सूर्य का धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश मकर संक्रान्ति के रूप में जाना जाता है।
जब सूर्य मकर राशि में गोचर करते हैं तब इसे मकर संक्रांति कहा जाता है। मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन नवग्रहों के राजा सूर्य अपनी राशि परिवर्तन कर प्रात: 8 बजकर 05 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे।
मकर संक्रांति का पुण्यकाल दोपहर 13:43 से रात्रि 10:46 तक रहेगा। आचार्य पवन तिवारी और ज्योतिषाचार्य प्रेम पंजवानी ने बताया कि इस दिन श्रद्धालुओं को पवित्र नदी में कुटे तिल का उबटन लगाकर स्नान करना एवं तिल से बनी वस्तुओं, कम्बल व वस्त्रादि का दान करना शुभ रहेगा। इस दिन अगर अपनी राशि के अनुसार दान दिया जाए तो फल कई गुना बढ़ जाता है।
राशि के अनुसार दान
मेष- चादर एवं तिल का दान
वृषभ- वस्त्र एवं तिल
मिथुन- चादर एवं छाता
कर्क- साबूदाना व वस्त्र का दान
सिंह -कंबल व चादर
कन्या- तेल तथा उड़द दाल
तुला- रुई, वस्त्र, राई, सूती वस्त्र, चादर
वृश्चिक- खिचड़ी, कंबल
धनु- चने की दाल
मकर- कंबल, पुस्तक
कुंभ- साबुन, वस्त्र, कंघी, अन्न
मीन- साबूदाना, कंबल सूती वस्त्र तथा चादर का दान करें।