छत्रपति शाहूजी विश्वविद्यालय एवं अखिल भारतीय सर्व वैश्य महापरिषद के संयुक्त तत्वाधान में राष्ट
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कानपुर। मैथिलीशरण गुप्त ने हिंदी काव्य को सशक्त राष्ट्रवादी स्वर प्रदान किया। उनके काव्य ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक शक्ति दी। यह बातें छत्रपति शाहूजी महाराज विवि और अखिल भारतीय सर्व वैश्य महासभा के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय कवि मैथिलीशरण गुप्त की 139वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कही।
विवि में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद आबकारी एवं निषेध मंत्री नितिन अग्रवाल ने कहा कि मैथिलीशरण गुप्त ने आधुनिक हिंदी साहित्य को एक नई दिशा दी। महिलाओं, आम जन तथा हाशिए के समाजों की भावनाओं को स्वर प्रदान किया। उनका साहित्य मानवीय संवेदना की अभिव्यक्ति का उत्कृष्ट माध्यम है। विशेष व्याख्यान में बीबीयू लखनऊ के विभागाध्यक्ष प्रो. सर्वेश सिंह, लखनऊ विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष, प्रो. पवन अग्रवाल ने अपने विचार रखे।
संगोष्ठी की अध्यक्षता कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने की। उन्होंने उच्च शिक्षा में हिंदी एवं संस्कृत के प्रति छात्रों की घटती रूचि पर चिंता व्यक्त की। समाधान के लिए सामाजिक संस्थाओं से आगे आने का आह्वान किया। इस दौरान साहित्यिक प्रदर्शन में गीत त्रिपाठी को पहला, वैशाली विश्नोई को दूसरा और आयुषी मिश्रा को तीसरा स्थान मिला। कार्यक्रम का संचालन भाषा संकाय के डॉ. श्रीप्रकाश और वैश्य महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय गुप्ता ने किया। कार्यक्रम में डॉ. सर्वेश मणि त्रिपाठी, अनुराग अग्रवाल, संजय गुप्ता, शुभांग गुप्ता, योगेश अग्रवाल, रतन श्रीवास्तव, विश्वनाथ आदि मौजूद रहे।