मो. रफी का मशहूर गाना ‘मैं रिक्शा वाला, मैं रिक्शा वाला, है चार के बराबर ये दो पांव वाला कहां चलोगे बाबू कहां चलोगे लाला’ भला किसको भूलेगा लेकिन यहां बात हो रही है ‘रिक्शा वाली’ की।
नौबस्ता के पास झोपड़ी में रहने वाली शीलू कश्यप शहर की पहली ऐसी महिला हैं, जो ई-रिक्शा चलाती हैं। करीब पांच महीने पहले पति की प्रताड़ना से आहत होकर शीलू अपनी तीन मासूम बच्चियों को लेकर घर से बाहर निकल गई थीं।
नौबस्ता गल्ला मंडी के पास झोपड़ी बनाकर रहने लगीं। कुछ दिन तक इधर उधर मजदूरी करके काम चलाया। उसके बाद उसकी मदद के लिए स्थानीय निवासी गौतम शुक्ला सामने आए।
उन्होंने शीलू को ई रिक्शा सीखकर उसे चलाने की सलाह दी। शीलू ई-रिक्शा चलाकर दूसरे बच्चों के साथ अपनी बेटियों को भी स्कूल ले जाती है। उसकी इस लगन और मेहनत की पूरे क्षेत्र में चर्चा है।
शीलू बताती हैं कि जबसे वह ई-रिक्शा चलाकर कुछ पैसे कमाने लगी हैं, उनका आत्मविश्वास बढ़ गया है। उन्हंे अपनी बेटियों को पढ़ा लिखाकर बड़ा बनाने की इच्छा है। शीलू ने बताया कि 13 साल पहले उनकी शादी हुई थी। विश्व बैंक बर्रा में उनकी ससुराल है। लेकिन पति के शराब की आदत से परेशान होकर उन्होंने घर छोड़ दिया। उनकी तीन बेटियां पलक (10), वंशिका (7) और परी (5) साल की हैं।