महोबा। शहर में दो कोरोना पॉजिटिव मरीज मिलने के बाद सीमा सील करने के नाम पर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश को जोड़ने वाली प्रमुख सड़क सरकारी कर्मचारियों ने ही खोद डाली। लाखों की लागत की इस सड़क को जेसीबी मशीन से उखाड़ने के फैसले पर सवाल उठ रहे हैं।
लोगों का कहना है कि दो राज्यों की सीमा पर गहरी खाई खोदने के बाद दूध, रसोई गैस, पेट्रोलियम पदार्थ व अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति करने वाले वाहनों की आवाजाही कैसे होगी। इमरजेंसी में घिरे मरीज या आपातकाल में पुलिस व दमकल का मूवमेंट इधर से उधर कराने जैसी जरूरतों का क्या रास्ता निकाला जाएगा।
महोबा के कबरई को एमपी के लवकुश नगर (छतरपुर) से जोड़ने वाली सड़क सीमावर्ती गांवों में रहने वाले दोनों प्रदेशों के लोगों के लिए काफी महत्वपूर्ण है। दोनों राज्यों के लोग एक-दूसरे के क्षेत्रों में आवाजाही के लिए इस रोड पर निर्भर रहते हैं।
सीमा से सटे एमपी के बसारी, बदौरा, प्रकाश बम्हौरी, चंदवारा, मुढ़ारा, इटवां और बारीगढ़ के ग्रामीणों ने सड़क क्षतिग्रस्त किए जाने पर सवाल उठाए। प्रकाश बम्हौरी निवासी रामसिंह, करन सिंह, इटवां निवासी रामस्वरूप और मुढ़ारा निवासी रामकिशुन का कहना है कि गर्भवतियों के प्रसव व अन्य रोगों के इलाज के लिए महोबा के जिला अस्पताल व अन्य स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर रहते हैं। अब छतरपुर जिले जाने के लिए करीब 70 से 75 किमी लंबा सफर करना पड़ेगा।
बड़े वाहनों से मध्य प्रदेश से आवाजाही ज्यादा होने के कारण ऐसा निर्णय लिया गया है। जरूरी सेवाओं और इमरजेंसी मरीजों को दूसरे रास्तों से लाने-ले जाने की गुंजाइश बची है। वैकल्पिक रास्ता लंबा होने से थोड़ा समय ज्यादा लग सकता है।
आरएस वर्मा, एडीएम, महोबा