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कानपुर: महावीर केवल जैनों के नहीं, जन-जन के थे, मुनि बोले- कर्म से महान बनता है व्यक्ति

Fri, 11 Sep 2026 06:17 PM IST
प्रसून शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला,कानपुर

सार

kanpur News: श्री धर्मनाथ जैन कांच मंदिर, जैन भवन में चल रहे चातुर्मास के दौरान पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के तीसरे दिन महावीर स्वामी के जीवन और उनके संदेश पर प्रवचन हुआ। आचार्य श्री जयन्तसेनसूरिजी के शिष्य मुनि डॉ. संयमरत्न विजय जी और मुनि भुवनरत्न विजय जी ने कल्पसूत्र का वाचन करते हुए कहा कि कोई व्यक्ति जन्म और जाति से महान नहीं होता, बल्कि अपने कर्मों से महान बनता है।
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मुनि भुवनरत्न विजय ने कल्पसूत्र का वाचन किया - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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मुनियों ने कहा कि महावीर स्वामी का संदेश किसी एक वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं था। महावीर केवल जैनों के नहीं, बल्कि जन-जन के थे। उनकी दृष्टि में अपना और पराया जैसा कोई भेद नहीं था। उनका जन्म समस्त जीवों के कल्याण के लिए हुआ था।

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घर छोड़ना त्याग, भीतर से मोह निकालना वैराग्य

प्रवचन में कहा गया कि महावीर स्वामी ने संसार को त्याग और वैराग्य का मार्ग दिखाया। घर छोड़ देने वाला त्यागी होता है, लेकिन घर और संसार के मोह को अपने भीतर से निकाल देने वाला वैरागी कहलाता है। मुनियों ने कहा कि महावीर के संदेश की व्यापकता को इस बात से समझा जा सकता है कि सूर्य और चंद्रमा का प्रकाश सभी के लिए है, अग्नि सबका भोजन पकाती है, जल सबकी प्यास बुझाता है और वृक्ष की छाया सभी को मिलती है। उसी तरह महावीर और उनका संदेश भी सभी के लिए है।

महापुरुषों पर पूरी मानवता का अधिकार

प्रवचन में कहा गया कि जिस तरह मां पर उसके सभी बेटों का अधिकार होता है, उसी प्रकार महापुरुषों पर पूरी मानव जाति का अधिकार होता है। महावीर ने किसी के प्रति अपना-पराया का भेद नहीं रखा और सभी जीवों के कल्याण का संदेश दिया। मुनियों ने कहा कि महावीर को प्राप्त करने के लिए संसार के मोह को छोड़ना होगा और स्वयं को प्राप्त करने के लिए अहंकार और आसक्ति का त्याग करना होगा। उनके जीवन का संदेश मनुष्य को बाहरी मोह से हटकर आत्मचिंतन और आत्मकल्याण की ओर ले जाता है।

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कल्पसूत्र वाचन का महत्व बताया

इस दौरान कल्पसूत्र के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। मुनियों ने कहा कि कल्पसूत्र का एक-एक अक्षर श्रद्धा और भावना के साथ सुनने से जीव को आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है। कल्पसूत्र को कल्पवृक्ष के समान बताते हुए कहा गया कि यह मनुष्य को आत्मकल्याण और मोक्ष के मार्ग की ओर प्रेरित करता है। पर्युषण पर्व के तीसरे दिन हुए इस आयोजन में श्रद्धालुओं ने कल्पसूत्र का वाचन और प्रवचन सुना।

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