कानपुर में एसोसिएशन ऑफ साइकेट्रिस्ट्स इन प्राइवेट प्रैक्टिस (एपीपीपी) की 17वीं वार्षिक कॉफ्रेंस में बताया गया कि एकाकी परिवारों में भी लोगों ने मोबाइल फोन के चक्कर में साथ बैठकर बतियाना कम कर दिया है। इससे परिवार में रह कर हर शख्स अकेलेपन के अहसास में जीता है जिससे स्ट्रेस बढ़ता है और डिप्रेशन आ जाता है।
ब्रिज कैंडी हॉस्पिटल, मुंबई के वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. वीएन वहिआ ने बॉलीवुड के सितारों का उदाहरण देकर बताया कि आर्थिक समृद्धि और ग्लैमर से भी डिप्रेशन रुकता नहीं है। सकरात्मक सोच रखें, घुटन में न रहें, अपने मसले शेयर करें।