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UP: चेहरा हुआ ओझल, अब वैश्य और ब्राह्मण उम्मीदवार में उलझी कांग्रेस; इस सीट पर पार्टी के पास सिर्फ ये दो नाम

Fri, 15 Mar 2024 12:55 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर

सार

यूपी में कांग्रेस और सपा गठबंधन में लोकसभा चुनाव लड़ रही हैं। कानपुर सीट कांग्रेस के खाते में आई है। कांग्रेस इस सीट पर अब वैश्य और ब्राह्मण प्रत्याशी में उलझ गई है। अजय कपूर के भाजपा में जाने के बाद नगर सीट के प्रत्याशी को लेकर ऊहापोह की स्थिति है।
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lok sabha election - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानपुर नगर सीट से कांग्रेस के प्रबल दावेदार माने जा रहे अजय कपूर के भाजपा में जाने के बाद पार्टी के सामने ऊहापोह की स्थिति बन गई है। अजय कपूर पार्टी जिन्हें सर्वमान्य चेहरा समझ रही थी, उनके पार्टी छोड़ने के बाद कांग्रेस अब इस उलझन में है कि ब्राह्मण को प्रत्याशी बनाएं या वैश्य बिरादरी के प्रत्याशी को मौका दें। क्योंकि इन दोनों ही बिरादरी के मतदाताओं की संख्या अच्छी-खासी है।
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एक सप्ताह पहले प्रदेश चयन समिति की ओर से तीन नेताओं के नाम पार्टी केंद्रीय इकाई को भेजे गए थे, जिसमें अजय कपूर, आलोक मिश्रा और पवन गुप्ता का नाम शामिल था। अब सिर्फ दो चेहरे ही रह गए हैं। दोनों ही लोकसभा चुनाव के लिए नए हैं। कांग्रेस में महानगर सीट से प्रत्याशी की घोषणा अगले एक सप्ताह के अंदर होनी है। 

इसके लिए गुरुवार को भी दिल्ली में केंद्रीय कमेटी की बैठक में अन्य सीटों के साथ कानपुर की सीट को लेकर भी चर्चा की गई। पता चला है कि 18 मार्च को प्रत्याशी घोषित करने के लिए फाइनल सूची तैयार की जाएगी। इसमें किसी एक के नाम पर मुहर लग सकती है।
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बाह्मण प्रत्याशी ही क्यों, इसे लेकर जो मंथन चल रहा है, उसमें यह बात सामने आई है कि महानगर सीट पर सबसे ज्यादा मतदाता इसी बिरादरी से आते हैं। ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या करीब 6.5 लाख बताई जाती है। इसी तरह वैश्य बिरादरी की बात करें तो इसके मतदाताओं की यहां पर कुल संख्या करीब 4.5 लाख के आसपास है। 

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श्रीप्रकाश इसी वैश्य बिरादरी से आते हैं, जो महानगर सीट से वर्ष 1999 से लेकर 2009 के बीच तीन बार लगातार सांसद चुने गए। दो बार केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे।

इसी तरह ब्राह्मण बिरादरी की बात करें तो कांग्रेस से हरिहरनाथ शास्त्री, शिवनारायण टंडन व नरेश चंद्र चतुर्वेदी इसी सीट से सांसद चुने गए हैं। भाजपा की बात करें तो इस सीट से सत्यदेव पचौरी, मुरली मनोहर जोशी और जगतवीर सिंह द्रोण भी ब्राह्मण मतदाताओं के बल पर भी चुनाव जीतकर आए हैं।

इस तरह हैं ब्राह्मण और वैश्य जातियां
ब्राह्मण मतदाता.... कुल संख्या 6.5 लाख, जिसमें कान्यकुब्ज और सरयू पारी हैं। इसके अलावा युजुर्वेदी, अग्निहोत्री, कश्मीरी, सारस्वत, मारवाड़ी ब्राह्मण, गौड़, मैथिल व मराठी ब्राह्मण मतदाता शामिल हैं।

वैश्य मतदाता...कुल संख्या 4.5 लाख, जिसमें ओमर, दोसर, साहू, तेली, अयोध्यावासी (हलवाई), गुलहरे, गहोई, अग्रहरि, अग्रवाल, कसौधन, केसरवानी वैश्य मतदाता शामिल हैं।

दिग्गजों के पाला बदलने से वरिष्ठों पर भरोसा करने से ठिठकी पार्टी
ब्राह्मण या वैश्य प्रत्याशी को लेकर मंथन में जुटी कांग्रेस अब अजय कपूर के दल बदलने के बाद युवा प्रत्याशी पर भी दांव लगाने पर विचार कर रही है। पार्टी के एक धड़े का मानना है कि पार्टी ऐसा प्रत्याशी चुने जो न सिर्फ जातीय व वोटों के समीकरण में फिट बैठे, बल्कि वह पार्टी के भविष्य का चेहरा भी हो।
 

दरअसल, पुराने नेताओं के दलबदलू होने के रवैये के बीच कांग्रेस आलाकमान के सामने बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि वह फिर से पुराने नेताओं पर दांव लगाए या नए चेहरे को मौका दे। पार्टी का एक बड़ा धड़ा इस बात पर जोर दे रहा है कि जिस तरह कांग्रेस बुजुर्ग नेताओं की पार्टी बनकर रह गई, उससे युवा पार्टी से जुड़ने में हिचक रहे हैं। ऐसे में कुछ कांग्रेसियों का मानना है कि किसी युवा को टिकट देकर पार्टी भविष्य की राजनीति की नींव रख सकती है।
 

जिन तीन नामों का पैनल पार्टी ने तैयार किया था, उनमें से आलोक मिश्रा दो बार विधानसभा का चुनाव लड़े लेकिन हार का सामना करना पड़ा। उनकी पत्नी वंदना मेयर का चुनाव लड़ी, लेकिन जीत नहीं सकीं। पवन गुप्ता 1998 में बसपा के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़े और चौथे स्थान पर रहे। इसके बाद एक बार विधानसभा और फिर मेयर का चुनाव लड़कर हार चुके हैं। 
 
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सिर्फ अजय कपूर ही एक ऐसे नेता थे जो तीन बार जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। वहीं पार्टी के आला नेताओं के पास कुछ युवा व संगठन से जुड़े नेताओं के नाम भी पहुंचे हैं। ऐसे में अब देखना यह होगा कि 18 को होने वाली सीईसी की बैठक में पार्टी किस चेहरे पर अपनी मुहर लगाती है।
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