राजनीतिक जानकारों के अनुसार जातिगत आंकड़े
सरकारी तौर पर प्रदेश में कभी जातिगत जनगणना नहीं हुई, इससे जातिगत आंकड़ों पर भी दावा नहीं किया जा सकता। हालांकि राजनीतिक जानकार जातीय गणित खूब लगा रहे हैं। लोकसभा क्षेत्र में कुल 17 लाख 13 हजार 583 मतदाता हैं। जानकारों के अनुसार पांच विधानसभा क्षेत्रों में सर्वाधिक लोधी मतदाता करीब दो लाख 40 हजार, जबकि शाक्य मतदाता दो लाख 30 हजार हैं। तीसरे नंबर पर मुस्लिम मतदाता करीब दो लाख 25 हजार, यादव करीब एक लाख 90 हजार, क्षत्रिय एक लाख 80 हजार व ब्राह्मण मतदाता अनुमानित एक लाख 50 हजार बताए जा रहे हैं। यह मतदाता लोकसभा चुनाव में निर्णायक साबित होते हैं। दलीय प्रत्याशी लोधी, शाक्य व ब्राह्मण समाज से हैं। अब देखना यह है कि कौन प्रत्याशी दूसरी जाति के मतदाताओं में सेंध लगाकर अपना जातीय गणित फिट कर पाएंगे। किसके सिर जीत का सेहरा सजेगा और किसको हार का सामना करना पड़ेगा। हालांकि मतदाता भी सभी को जीत का भरोसा देकर खुलकर सामने आने के बजाय चुप्पी साधे बैठे हैं। खास बात तो यह है कि सरकारी योजनाओं का सर्वाधिक लाभ लेने वालों के भी बोल बदलते दिख रहे हैं।