कानपुर में शब-ए-बराअत की तिथि को लेकर विवाद पैदा हो गया है। मुस्लिमों का एक गुट आठ अप्रैल को शब-ए-बराअत होने की बात कर रहा है। इस संबंध में मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इसका खंडन करते हुए बरेली से फतवा जारी करके बताया गया है कि शब-ए-बराअत नौ अप्रैल को ही होगी।
आल इंडिया गरीब नवाज कौंसिल के कौमी सदर मौलाना मो. हाशिम अशरफी ने बताया कि शब-ए-बराअत 9 अप्रैल को ही होगी। कुछ लोगों ने गलत मैसेज वायरल किया है। शहर के उलमा को सुन्नी मरकज दरगाह आला हजरत की ओर से जारी किया गया फतवा भेजा गया। इसमें काजी-ए-हिंदुस्तान मुफ्ती मो. असजद रजा खां के हवाले से बताया गया कि शाबान की पहली तारीख 27 मार्च को थी।
इससे 14 शाबानुल मोअज्जम यानी शब-ए-बराअत 9 अप्रैल को गुरुवार के दिन मनाई जाएगी। जुमा को शाबान की आठ तारीख होगी। मौलाना अशरफी ने शब-ए-बराअत घरों में मनाए जाने के साथ बरेली के फतवे का समर्थन किया और अपील की कि लोग गुनाहों से बचें। किसी का हक न मारें। हकतलफी जैसे गुनाहों का ही नतीजा है कि कोरोना जैसी वबा आती है।