फरीदपुर निटर्रा गांव में फूलों की फसल दिखाता किसान।
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कानपुर देहात। लॉकडाउन के दौरान खेतों में लगे फूल जिले से बाहर की मंडियों तक नहीं पहुंच सके। ऐसे में फायदे का सौदा कही जाने वाली फूलों की खेती में भी किसानों को लाखों का नुकसान उठा पड़ा है। खेतों में ही फूल मुरझा गए और किसान देखते ही रहे।
संदलपुर ब्लाक के फरीदपुर निटर्रा गांव निवासी किसान बाबूलाल निषाद ने लॉकडाउन के पहले पारंपरिक खेती से अलग हटकर ग्लेडियोलस व गेंदा की दो बीघे में फूलों की खेती की थी। किसान ने बताया कि उन्नत किस्म के बीज बोए थे। बीज, खाद, सिंचाई समेत अन्य लागत में 40 हजार रुपये खर्च हुए। फूलों की फसल भी खूब लहलहा रही थी। लॉकडाउन ने मंसूबों पर पानी फेर दिया। मंदिर, शादी, बुके की दुकान समेत अन्य समारोहों के लिए फूलों की डिमांड पूरी तरह से ठप पड़ गई। कोरोना वायरस के चलते लोगों ने घरों में भी फूल लेना बंद कर दिया। ऐसे मेें फूल तोड़ने के बाद भी बेकार साबित हो रहे थे।
फूलों को खेत से तोड़कर किनारे पर डाल दिया। फूलों का धंधा चौपट होने से अब तक दो लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। किसान बाबू लाल निषाद ने बताया कि ग्लेडियोलस की एक स्टिक बाजार में 20 से 500 रुपये तक बिकती थी, लेकिन अब कोई नहीं खरीद रहा। ऐसे में फूलों की खेती को बंद कर अब पारंपरिक धान, गेेहूं, जायद की फसलों की बुआई करेंगे। जिला उद्यान अधिकारी सुभाष चंद्र ने कहा कि फूल की खेती में किसानों को काफी नुकसान हुआ है। किसान दूसरी खेती करने का इरादा बना रहे हैं। किसान किसी भी प्रकार की समस्या पर उनसे संपर्क कर समाधान करे। उनकी समस्या का समाधान करने का प्रयास होगा।