नई शिक्षा नीति के तहत 30 फीसदी पाठ्यक्रम को विश्वविद्यालयों को अपने स्तर से निर्धारित करना है। बैठक में तय हुआ कि कन्नौज की तरफ बोली जाने वाली कन्नौजी, उन्नाव की बैसवारी, अवधी, ब्रज समेत अन्य बोलियों को शामिल किया जाएगा।
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के स्नातक के पाठ्यक्रम में अब स्थानीय बोलियों और साहित्यकारों को शामिल किया जाएगा। विवि परिक्षेत्र में आने वाली बोलियों, राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त साहित्यकारों और उनकी रचनाओं के बारे में छात्रों को पढ़ाया जाएगा।
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यह फैसला बुधवार को कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक की अध्यक्षता में हुई विवि की बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक में हुआ। फैसले पर कार्यपरिषद की मुहर लगनी बाकी है। इसके बाद शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। नई शिक्षा नीति के तहत 30 फीसदी पाठ्यक्रम को विश्वविद्यालयों को अपने स्तर से निर्धारित करना है। बैठक में तय हुआ कि कन्नौज की तरफ बोली जाने वाली कन्नौजी, उन्नाव की बैसवारी, अवधी, ब्रज समेत अन्य बोलियों को शामिल किया जाएगा। इसके अलावा इन्हीं परिक्षेत्रों से जुड़े राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त साहित्यकारों उनकी रचनाओं को भी पाठ्यक्रम में स्थान दिया जाएगा।
स्नातक में अब हिंदी एकमात्र विषय
स्नातक में हिंदी भाषा और हिंदी साहित्य विषय को खत्म करके हिंदी को एकमात्र विषय के रूप में कर दिया गया है। हालांकि इस बदलाव से हिंदी शिक्षक खासे नाराज हैं। उनका कहना है ऐसा करने से संपूर्ण साहित्य और भाषा को छात्रों को समझाने में मुश्किल होगी। डीजी कॉलेज अर्मापुर की प्राचार्य डॉ. गायत्री सिंह कहती हैं कि हिंदी भाषा और साहित्य का समावेश एक विषय में नहीं किया जा सकता है। 12 सालों का साहित्य केवल 4 पेपर में समेटना गलत होगा।