कानपुर के 'मधुरम खरे' एक बेहतरीन संगीतकार के रूप में उभर कर सामने आए हैं। महज पन्द्रह साल की उम्र में इस लड़के ने वह कमाल कर दिखाया है जिसकी वजह से आज पूरा कानपुर इसे जानने लगा है। हर कोई मधुरम की तरह बनना चाहता है और मधुरम जैसा हुनर अपने भीतर भरना चाहता है। इसलिए इस नन्हे संगीतकार को आज कई लोग अपना गुरू तक बनाने को तैयार है।
विज्ञापन
पियानो बजाता हुआ कोई देख भर ले तो हो जाए इनका दिवाना
मधुरम खरे किबोर्ड पर म्यूजिक बजाते हुए
मधुरम की कला ने सबको अपना कायल कर दिया है। बस कोई एक बार उन्हें किबोर्ड या पियानो बजाता हुआ देख भर ले... वह पक्का उसका दिवाना बन बैठेगा। बाल उस्ताद की अंगुलियों में है ही ऐसा जादू कि जब वे पियानो को छूती है तो मधुर सुरों की तान कानों को सुनाई देने लगती है।
7 साल की उम्र में ही संगीत सीखना शुरू किया
मधुरम खरे
इसके पीछे आज मधुरम की कड़ी मेहनत और लगन है। मधुरम ने महज 7 साल की उम्र में ही संगीत में दिलचस्पी दिखाई थी और इसकी शुरुआत उनके स्कूल से हुई। यहीं पर उसे संगीत सिखाने वाले गुरू आदित्य मिले जिनके सानिध्य में रहकर मधुरम 'लोहे से कुंदन' के रूप में बाहर निकला।
सामने आए कई बड़े-बड़े संगीतकार लेकिन कभी न मानी हार
मधुरम खरे का गायन में भी कमाल
यहां से मधुरम संगीत की ऐसी दुनिया में उतरा जहां उसके सामने बड़े-बड़े संगीतकार आए लेकिन उनके सामने बाल उस्ताद ने कभी हार नहीं मानी। इसी बुलंद हौंसले के बल पर मधुरम ने अच्छो-अच्छो को मात दी। इस सफर में मधुरम ने कई बड़े अवॉर्ड अपने नाम किए।
दूरदर्शन पर भी प्रसारित किए जा चुके हैं मधुरम के कार्यक्रम
मधुरम खरे
मधुरम को तनिष्क, यूनाइटेड इन्स्टीट्यूट दक्षिण महोत्सव, डिजिट्रैक प्रोडक्शन म्यूजिक वैरियर और अन्य स्थानों द्वारा प्रथम व द्वितीय स्थान आने पर सम्मान मिला है। इसके अलावा काव्यांजलि सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था द्वारा विशिष्ट सम्मान भी मिला है। बता दें अभी तक मधुरम के कई कार्यक्रम दूरदर्शन पर भी प्रसारित किए जा चुके हैं।
मधुरम की अलबम 'सौ करोड़ हाथ' हो चुकी है रिलीज
मधुरम खरे गिटार बजाने में भी माहिर
केवल यही नहीं मधुरम अभी से म्यूजिक कंपोजिंग भी करने लगा है। मधुरम ने प्रधानी फिल्म के गीत में संगीत दिया है। खासबात ये है कि मधुरम का एक अलबम भी रिलीज हो चुका है। सुमित अग्रवाल प्रजेन्ट्स आउट ऑफ द बॉक्स मोशन पिक्चर्स के साथ मिलकर मधुरम ने 'सौ करोड़ हाथ' अलबम के लिए काम किया है।
मधुरम की मां मधु खरे बताती हैं कि अभी हम इसे सिन्थेसाइजर, गिटार भी सिखने के लिए भेज रहे हैं। जल्द ही वह इस कला मेंं भी पारंगत हो जाएगा। मधुकर कहते है उन्हें फैमिली की ओर से हमेशा सपोर्ट मिला। पिता रमेश खरे ने हमेशा हौंसला बढ़ाया। इसलिए आज वे बेहतर पियानोवादक बन पाया है।