कानपुर। गुजरात का मोडाल सिल्क का दुपट्टा हो या लेदर पर हैंडवर्क, ओडिशा की पट्टचित्रा पेंटिंग हो या कन्नौज का इत्र, उत्तराखंड का कुरकुरा चना-मेथी का पापड़ हो या बीटरूट चिप्स... क्राफ्टरूट की प्रदर्शनी में विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों के उत्पादों ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। चुन्नीगंज स्थित कन्वेंशन सेंटर में लगी प्रदर्शनी के दूसरे दिन लोगों की भीड़ रही। चूड़ियों, ज्वैलरी और साड़ियों के स्टॉल के अलावा लोगों को खाने-पीने के स्टॉल भी पसंद आए। प्रदर्शनी के प्रवेश द्वार पर रखा हैप्पी ड्रम लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा।
बाराबंकी से आए फैजल ने बताया कि गोवा में उन्होंने गांव जैसा दिखने वाला अफ्रीकी वाद्य यंत्र देखा था। उसी से प्रेरित होकर इसे देश के हिसाब से बनाया। लोहे से तैयार किए गए इस यंत्र को हैप्पी ड्रम नाम दिया गया है। गुजरात से डिंकी वहां के मोडाल और मशरू सिल्क से तैयार दुपट्टे लेकर पहुंची हैं। हाथों से तैयार इन दुपट्टों की कीमत 4000 रुपये से शुरू है। जेन-जी के लिए स्मार्ट जैकेट्स भी हैं, जिन पर फंकी लुक के साथ हैंडमेड काम किया गया है। गुजरात के नरेंद्र भाई लेदर के पर्स पर हस्तशिल्प का काम कर रहे हैं। 12 साल से इस काम से जुड़े नरेंद्र ने बताया कि साधारण लेदर बैग पर कारीगरी कर युवाओं के मुताबिक तैयार किया है। प्रदर्शनी में बैंक ऑफ महाराष्ट्र की डिप्टी मैनेजर नेहा, सीएसजेएमयू के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक, सीएसए के कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता, डॉ. नमिता तिवारी, चौधरी चरण सिंह विवि मेरठ की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला, डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि आगरा की कुलपति प्रो. आशु रानी सहित अन्य लोग भी पहुंचे।
गुजरात से आए संजय लहसुन, प्याज और टमाटर का सूखा मसाला लेकर आए हैं। उन्होंने बताया कि बिना तेल के इस मसाले को मिलाकर उबले खाने को स्वादिष्ट बनाया जा सकता है। पानी मिलाकर सूखे मसाले का पेस्ट बना सकते हैं। यह मसाला स्वाद के साथ स्वास्थ्यवर्धक भी है।
अलीगढ़ से आए चंदन के स्टॉल पर ब्रास की डेढ़ इंच की पंचमुखी हनुमान जी की छोटी मूर्ति से लेकर आठ फीट की वेंकटेश मूर्ति तक मौजूद है। पूजा के दीये, मां दुर्गा, शिव परिवार, राधा-कृष्ण और मां सरस्वती की मूर्तियों को भी लोगों ने पसंद किया। ओडिशा से आए कलाकारों ने बताया कि पट्टचित्रा पेंटिंग सिल्क के कपड़े पर तैयार की जाती है और इसमें रंग भरने के लिए स्टोन के रंगों का इस्तेमाल किया जाता है।