चित्रकूट। करीब 29 माह पूर्व रामघाट के तेल उद्यमी ब्रजेश रावत के जुड़वां बेटों प्रियांश व श्रेयांश की फिरौती के लिए अपहरण के बाद हत्या मामले में सोेमवार को मध्यप्रदेश के सतना के एडी विशेष न्यायालय के न्यायाधीश प्रदीप सिंह कछवाह ने पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। मुख्य तीन दोषियों को डबल उम्रकैद (सजा पूरी होने के बाद फिर सजा) की सजा मुकर्रर की।
फैसले के बाद तेल उद्यमी ने कहा कि सभी को फांसी को सजा मिलनी चाहिए थी। इसके लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा। 12 फरवरी 2019 को जुड़वां बच्चों की अपहरण के बाद हत्या के बहुचर्चित मामले में मध्यप्रदेश के सहायक जिला अभियोजन अधिकारी धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि एडी विशेष न्यायालय के न्यायाधीश ने जानकीकुंड के पदमाकांत शुक्ला, बबेरू के राजू द्विवेदी, बिसंडा के लकी तोमर को अपहरण के बाद हत्या का दोषी करार देते हुए डबल उम्रकैद की सजा सुनाई, जबकि बिहार प्रांत के विक्रमाजीत सिंह व बिसंडा के अपूर्व उर्फ पिंटा यादव को उम्रकैद की सजा सुनाई। मामले में छह आरोपी थे, जिसमें एक रामकेश यादव ने सतना जेल में खुदकुशी कर ली थी। सजा सुनाने के बाद पुलिस ने सभी पांचों अभियुक्तों को सतना जेल भेज दिया।
ये था मामला
स्कूल से लौटते समय अभियुक्तों ने स्कूल बस से हथियारों के बल पर दोनों जुड़वां बच्चों का अपहरण किया था। इसके बाद एक करोड़ रुपये की फिरौती मांगी गई थी। परिजनों ने बीस लाख रुपये देकर बाकी रकम बाद में देने को कहा, लेकिन अभियुक्तों ने जुड़वां बच्चों को गला घोटकर हत्या कर दी थी। लोहे की जंजीर व पत्थर से बांध कर जुड़वां बच्चों के शवों को बांदा के बबेरू के अगौसी नदी घाट पर फेंक दिया था।