दर्द की दास्तां बना नाबालिग का जीवन
पीड़िता जब सिर्फ दो साल की थी तो उसकी मां की मौत हो गई। नानी और मौसी ने सहारा दिया। बड़े होने पर उसके मानसिक रूप से कमजोर होने की जानकारी हुई तो किसी तरह बच्ची जीवन काट रही थी लेकिन पड़ोसी कमालुद्दीन की बुरी नजर उस पर पड़ गई। दुष्कर्म के कारण वह गर्भवती हो गई। दुष्कर्म का पता जब तक चला देर हो चुकी थी।
गर्भपात से बच्ची की जान को खतरा हो सकता था। ऐसे में नाबालिग ने बच्ची को जन्म दिया जो लगभग एक साल की है। जो खुद ही अभी नाबालिग है उस पर अपनी बच्ची के पालन-पोषण की जिम्मेदारी आ गई है। कमालुद्दीन घटना के बाद से जेल में ही बंद है। कोर्ट ने सजा में उसकी रहम की अपील भी खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि यह मानवता के विरुद्ध अपराध है इसलिए दोषी को मौत आने तक उसका बचा हुआ जीवन जेल में ही गुजारना होगा।