कानपुर देहात/राजपुर। जनपद की छह तहसीलों में शनिवार को आठ सूत्री मांगों को लेकर लेखपालों ने संपूर्ण समाधान दिवस का बहिष्कार किया। पूरे समय लेखपाल तहसील परिसर में धरने पर बैठे रहे। इसके चलते राजस्व संबंधी शिकायतों की जांच राजस्व निरीक्षक को सौंपी गई।
वेतन विसंगति दूर करने, पदोन्नति सूची जारी नहीं होने, बिना आधारभूत सुविधाओं के ग्राम सचिवालय में तैनाती और भत्ता वृद्धि आदि की मांगें प्रमुख हैं। प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर लेखपाल आंदोलन की राह पर हैं। बीते 22 सितंबर को जनपद के 144 अतिरिक्त कार्यक्षेत्र वाले गांवों के बस्ते लेखपाल भूलेख कार्यालय में जमा कर चुके हैं। इन गांवों के लोगों के ऑनलाइन प्रमाण पत्र भी नहीं बन पा रहे हैं जबकि राजस्व संबंधी शिकायतों का समाधान भी लंबित है।
इधर, शनिवार को सभी छह तहसीलों में लेखपालों ने संपूर्ण समाधान दिवस का बहिष्कार कर धरना दिया। अकबरपुर तहसील में इकाई अध्यक्ष राकेश चंद्र मिश्रा की अगुवाई में लेखपाल धरने पर बैठे। यहां रीतेश तिवारी, सौरभ, मिलन दुबे, अरुण कुमार, पूजा कुमारी आदि रहे। सिकंदरा तहसील में धरने पर तहसील अध्यक्ष अजय सिंह, उपाध्यक्ष रामराज, कलीम खान, विमल शुक्ला, भारत सिंह, विश्वजीत सिंह, विवेक शुक्ला, आरती कटियार आदि बैठे। रसूलाबाद तहसील में अध्यक्ष योगेश कुमार, हर्ष श्रीवास्तव, रावेन्द्र कुमार, प्रत्यूष्मणि पाठक, ब्रह्मपाल, कोमल सिंह, कुमार गौरव, प्रिया गुप्ता आदि रहे। इसी प्रकार डेरापुर तहसील में अध्यक्ष शिवम शुक्ला व मंत्री देवेंद्र सिंह आदि रहे। मैथा तहसील में भी लेखपालों ने कार्य बहिष्कार किया।
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धरने के चलते खसरा लेने पहुंचे किसान लौटे
लेखपालों के धरने के कारण जिनई गांव से खसरा बनवाने तहसील पहुंचे शत्रुघन सिंह, रामपाल, कैलाश और श्याम सुंदर को वापस लौटना पड़ा। किसानों के अनुसार, भूमि संबंधी खसरा बनवाने के लिए वे तहसील पहुंचे थे लेकिन लेखपालों के धरने के चलते उनका काम नहीं हो सका।
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केस -एक
जमीन में नाम गलत, आवेदन लंबित
कसोलर निवासी प्रवीण कुमार ने बताया कि मौजा रंधीरपुर स्थित गाटा संख्या 216 में पिता से विरासत में मिली कृषि भूमि में नाम गलत दर्ज हो गया है। संशोधन के लिए ऑनलाइन आवेदन किया है लेकिन यह लंबित है। लेखपालों के कार्य बहिष्कार के चलते खतौनी में सही नाम दर्ज नहीं हो पा रहा है।
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केस - दो
जमीन की नहीं हो पा रही नापजोख
खासबरा निवासी रमाकांती ने बताया कि कई वर्षों से पति से अनबन के चलते वह बच्चों के साथ अलग निवास कर रही है। उनके नाम दर्ज कृषि भूमि की पैमाइश का मामला लंबित है। लेखपालों की कार्य बहिष्कार के चलते सुनवाई नहीं हो पा रही है।
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केस - तीन
टीम में लेखपाल जमा कर चुके बस्ता
रसधान निवासी रघुनंदन ने बताया कि पैतृक प्लॉट पर पड़ोसी ने कब्जा कर लिया है। कब्जा हटवाने के लिए एसडीएम ने राजस्व टीम का गठन किया है लेकिन अतिरिक्त कार्य क्षेत्र में लेखपालों का कार्य बहिष्कार है। लेखपाल बस्ते जमा कर चुके हैं। इसके के चलते राजस्व टीम मौके पर नहीं जा रही है।
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लेखपालों के चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तय
कानपुर देहात। लेखपालों के चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तय है। इसके तहत आठ अक्तूबर को समस्त लेखपाल तहसीलों में प्रशासनिक व्हाट्सएप ग्रुप को छोड़ते हुए समस्त ऑनलाइन कार्यों (आय, जाति, निवास, प्रमाणपत्र व वरासत रिपोर्ट, फार्मर रजिस्ट्रेशन, सत्यापन, आदि) का बहिष्कार करेंगे। 10 अक्तूबर को काली पट्टी बांधकर थाना दिवस पर कार्य करेंगे। 12 अक्तूबर को तहसील व जिला मुख्यालय पर शिविर में रक्तदान करेंगे। 14 अक्तूबर को अपराह्न एक बजे जिला मुख्यालय पर मोटरसाइकिल रैली निकालेंगे। 17 अक्तूबर से 23 अक्तूबर तक समस्त लेखपाल संपूर्ण कार्य बहिष्कार करते हुए तहसील मुख्यालयों पर सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक धरना प्रदर्शन करेंगे। 24 अक्तूबर से अनिश्चितकालीन समय तक समस्त लेखपाल संपूर्ण कार्य बहिष्कार करते हुए जिला मुख्यालयों पर सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक धरना देंगे। (संवाद)