दो अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र में हो चुके थे दाखिल
एसटीएफ के मुताबिक सूचना मिलने के बाद संबंधित केंद्रों पर दबिश शुरू की गई। इस दौरान गोविंद नगर से जय सिंह व रणविजय को परीक्षा केंद्र के भीतर से पकड़ा। जितेंद्र, रवि, सौरभ, अजीत व करन भीतर दाखिल होने वाले ही थे कि उसके पहले ही टीम ने उनको दबोच लिया। जो दो मुन्ना भाई भीतर दाखिल हुए थे वह वहां की चेकिंग पार कर चुके थे। अगर गिरोह पकड़ा न जाता तो वह आसानी से परीक्षा देकर निकल जाते।
इंटरनेट कॉल के जरिये होती बात
इंटरनेट कॉल के जरिये सभी अभ्यर्थी सॉल्वर के संपर्क में थे। डिवाइस में कोई भी स्पीकर नहीं लगा था। इस वजह से उसमें कोई आवाज नहीं थी। ब्लूटूथ भी बहुत छोटा था जो कान में इस तरह से लगा हुआ था कि कोई समझ ही नहीं सका। इंटरनेट कॉल इसलिए की गई थी, जिससे सॉल्वर व अभ्यर्थी का कनेक्शन जांच एजेंसियां न पकड़ पाएं लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
इस तरह शहर में मुन्नाभाई तक पहुंची एसटीएफ
एसटीएफ मेरठ यूनिट ने संदीप कुमार की जगह पर सॉल्वर मोहित को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में पूरे नेटवर्क की जानकारी हुई। मेरठ एसटीएफ के अफसरों ने जानकारी मुख्यालय के अफसरों से साझा की, जहां से संबंधित जिलों की यूनिट को जानकारी दी गई। उसी आधार पर कार्रवाई शुरू हुई।
मेटल डिटेक्टर भी नहीं पकड़ सका सॉल्वरों का डिवाइस
लेखपाल भर्ती में सेंधमारी करने वाला गिरोह बेहद शातिर है, अभ्यर्थियों के कानों में रबर का ब्लूटूथ लगा था, एक हाथ की बाजू पर डिजिटल चिप बंधी थी जो केंद्रों में लगे मेटल डिटेक्टर तक में पकड़ में नहीं आई। चिप के जरिये इंटरनेट कॉल से वे सॉल्वर से जुड़े थे। गिरफ्तार अभ्यर्थियों ने बताया कि दस-दस लाख रुपये में भर्ती परीक्षा पास कराने का ठेका दिया था।
प्रयागराज का है सरगना, उसी ने दी थी डिवाइस
एसटीएफ के साथ मिलकर कमिश्नरी पुलिस ने शहर में कार्रवाई की है। अभ्यर्थियों के पास से बरामद चिप और ब्लूटूथ को देखकर अफसर भी चौंक गए। चिप में ही एक सिम लगा हुआ है, जिसे अभ्यर्थियों ने बाजू पर बांध रखा था। चिप बहुत ही छोटी है, स्किन कलर का रबर का ब्लू टूथ है।
तीन दिनों तक दी थी ट्रेनिंग
अभ्यर्थियों ने बताया कि दस-दस लाख रुपये में प्रयागराज निवासी विजय कांत पटेल ने परीक्षा पास कराने का ठेका लिया था। कुछ रकम एडवांस बाकी परीक्षा पास होने के बाद देने का सौदा हुआ था। उसी ने ब्लूटूथ और चिप भी दी थी। गिरोह ने इन सभी को प्रयागराज बुलाकर डिवाइस का इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग की दी थी। जिसमें बताया था कि किस तरह से इसे नेट से कनेक्ट कर ब्लूटूथ से कनेक्ट करना है और कैसे कॉल करनी है।
सुबह पांच बजे से सक्रिय हुई थी एसटीएफ
एसटीएफ को जानकारी मिली थी कि परीक्षा में बड़े पैमाने पर सॉल्वर बैठने वाले हैं। इसलिए अलग-अलग टीमें शहर में सक्रिय हो गईं थीं। वह परीक्षा केंद्रों के आसपास ही थे। उसके पहले ही डिवाइस लेकर परीक्षा देने पहुंचे अभ्यर्थियों के बारे में टीम को जानकारी मिल गई। इसलिए उनकी गिरफ्तारी शुरू कर दी। सूत्रों के मुताबिक बहुत से सॉल्वर भी परीक्षा देने पहुंचे थे लेकिन वह दाखिल नहीं हो सके। कार्रवाई की जानकारी होते ही वह वहां से निकल गए।
कोचिंग सेंटरों के जरिये करते हैं संपर्क
एसटीएफ को जानकारी मिली है कि सॉल्वर गैंग के सदस्य शहरों की कोचिंग मंडी में सक्रिय हैं। वहीं से वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों से संपर्क करते हैं। उनमें से कोई न कोई उनके जाल में फंस जाते हैं। पूर्वांचल के कई सॉल्वर गैंग सक्रिय हैं।
प्रयागराज में है मास्टरमाइंड
एसटीएफ के मुताबिक नकल व शिक्षा माफिया डॉ. केएल पटेल का करीबी है संदीप पेटल व विजय कांत पटेल। इन दोनों ने मिलकर परीक्षा में सेंधमारी की। मास्टरमाइंड डॉ. केएल पटेल है। ये सभी प्रयागराज के रहने वाले हैं। प्रयागराज एसटीएफ ने इन सभी को वहां से दबोचा है। केएल पटेल का प्रयागराज में आईटीआई का कॉलेज है। विजयकांत वहां काम कर चुका है। उसके बाद यह पूरा गिरोह चलाने लगे।