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Kanpur News: मेहनत नहीं आरामतलबी से हो रहीं हड्डियां कमजोर

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कानपुर। आरामतलबी की जिंदगी भले ही अच्छी लगे लेकिन इससे शरीर तकलीफ में पड़ जाता है। हाथ-पैर का जब अधिक इस्तेमाल नहीं होता तो मस्तिष्क का सेंटर वहां पर ब्लड सप्लाई घटा देता है। इससे जोड़ और हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। यहां तक की नस और नर्व में कमजोरी शरीर का संतुलन बिगाड़ देती है। यह बात ऑस्ट्रेलिया से आए जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के पुरातन छात्र वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. आलोक राजवंशी ने बताई।
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डॉ. राजवंशी जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के वर्ष 1971 के बैच पैरा क्यूआर के ग्रैंड रियूनियन में शिरकत करने आए हैं। डॉ. राजवंशी ने विश्व स्तर पर चल रहे शोधों के हवाले से बताया कि आरामतलबी की जिंदगी से आस्टियोपोरोसिस की समस्या बढ़ी है। 50 साल की आयु के बाद यह दिक्कत बढ़ रही है। शारीरिक श्रम, व्यायाम की कमी और आरामतलबी की जिंदगी से सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। नस और नर्व की कमजोरी से शरीर का संतुलन बिगड़ता है तो लोग गिरते हैं। इससे हड्डियां टूट जाती हैं। इससे जीवन की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है।
उन्होंने बताया कि आस्टियोपोरोसिस के रोगियों का आयु वर्ग घटा है। बुढ़ापे की दिक्कतें युवावस्था में हो रही हैं। डॉ. राजवंशी ने बताया कि देश में विटामिन डी की कमी होना प्रमुख समस्या हो गई है। मुफ्त की मिलने वाली धूप भी लोग ढंग से नहीं ले पा रहे हैं। अगर सुबह की धूप में आधा घंटे बैठें तो विटामिन डी मिलती रही। विटामिन डी की कमी से सिर्फ हड्डियां ही कमजोर नहीं होती हैं, व्यक्ति में अन्य कई तरह की समस्या पैदा हो जाती हैं। इनमें न्यूरो संबंधी दिक्कतें भी हैं। अचानक बेहोशी, चक्कर आदि आ सकता है। इसके अलावा दौड़ने, कूदने में हड्डियां टूट जाती हैं। आस्टियोपोरोसिस के रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
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