इस बार गंगा दशहरा पर 75 साल बाद दस दिव्य योग का संयोग बन रहा है, जो मनुष्य के दस प्रकार के पापों को दूर कर देगा। इसलिए इस दिन गंगा मइया में डुबकी अवश्य लगाएं। गंगा में यदि किन्हीं कारणों से डुबकी लगाना संभव न हो तो किसी नहर या नदी में मां गंगा कोे याद कर डुबकी लगाइए।
हां, इस दिन गंगाजल भरकर घर जरूर ले जाएं। जिनके घर में वास्तु दोष है, वे रोज घर में गंगाजल का छिड़काव करें। सकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवाहित होने लगेगी। आज 75 साल बाद दुर्लभ संयोग में गंगा दशहरा है।
ज्योतिष के अनुसार दस योग में ज्येष्ठ योग, व्यतिपात योग, गर करण योग, आनंद योग, कन्या राशि के चंद्रमा व वृषभ राशि के सूर्य की दशा में महायोग बन रहा है। इसलिए इसे ज्योतिषियों ने दस योग कहा है। उनकी मानें तो अबकी गंगा स्नान के दौरान दस प्रकार के पापों से भी छुटकारा मिल सकता है।
इसमें काम, क्रोध, लोभ, मोह, ईर्ष्या, ब्रह्महत्या, अवैध संबंध, धोखा, असत्य बोलना और जीव हत्या से मुक्ति का अवसर मिलेगा। गंगा स्नान के बाद दान-पुण्य अवश्य करें।
पंडित केए दुबे पद्मेश और आचार्य अमरेश मिश्रा का कहना है कि गंगा दशहरा ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाया जाता है। भगीरथ के तप के बाद मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। उन्हीं के पूजन के लिए गंगा दशहरा मनाया जाता है।
पंचागीय गणना से 75 साल बाद दस दिव्य योग बन रहे हैं। इस दिन पितरों को तारने व पुत्र, पौत्र व मनोवांछित फल के लिए भी पतित पावनी मां गंगा में डुबकी लगाएं।