ध्यान से आप अपने विषय में सबकुछ जान सकते हैं। पिरामिड को माध्यम बनाकर नियमित ध्यान लगाने से मनुष्य पूर्व जन्म के बारे में भी जान सकता है। ध्यान के लिए कम से कम डेढ़ घंटे का समय देना होगा। यह कहना है हैदराबाद के ब्रह्मर्षि सुभाष पत्री का।
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उन्होंने रविवार को कानपुर स्थित सिविल लाइंस स्थित मर्चेंट चैंबर हॉल में ध्यान प्रक्रिया का अभ्यास भी कराया। दो दिवसीय पिरामिड स्प्रिचुअल सोसाइटी मूवमेंट ऑफ इंडिया एवं भारतीय विचारक समिति के सम्मेलन के अंतिम दिन रविवार को उन्होंने वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति ध्यान के बारे में बताया।
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दिल्ली के डॉ. सौरभ रंजन ने बताया कि एक्यूप्रेशर और ध्यान से शारीरिक बीमारियों को दूर किया जा सकता है। हितेश और शुभांगी ने बताया कि ध्यान से लोग बहुत कुछ जान सकते है। वह पूर्व के साथ-साथ भविष्य के बारे में भी अवगत हो सकते है।
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इसके लिए ध्यान को नियमित लगाना होगा। साथ ही पिरामिड का भी प्रयोग करना होगा। इस मौके पर बलराम नरूला, डॉ.सारिका बाला मिश्रा, रमेश चंद्रा, गौरव शुक्ला, मनोज शुक्ला, रमेश चंद्रा, कुबेर गुप्ता, मुकेश पालीवाल, शरद चंद्र कोहली मौजूद थे।
चित्रकला प्रदर्शनी लगाई
पिरामिड स्प्रिचुअल सोसाइटी मूवमेंट ऑफ इंडिया एवं भारतीय विचारक समिति के सम्मेलन में चित्रकला प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। इसमें एएनडी कॉलेज के चित्रकला विभाग की विभागध्यक्ष डॉ.सारिका बाला मिश्रा के साथ 100 चित्रकारों ने कला का प्रदर्शन किया। इसका शुभारंभ हैदराबाद के ब्रह्मर्षि सुभाष पत्री ने किया। इस प्रदर्शनी में एएनडी कॉलेज, श्रीछत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय, डीएवी कॉलेज, अर्मापुर कॉलेज की छात्राओं ने भाग लिया।