उम्र कुल तेइस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी, हमको जीवित करने आयी, बन स्वतन्त्रता नारी थी...ये पक्तियां भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों का मुकाबला करने वाली पहली महिला व वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई के लिए कही गयी हैं। रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर जानें उनके जीवन से जुड़ी अनसुनी कहानियां...
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जानें लक्ष्मीबाई से जुड़ी विशेष बातें
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रानी लक्ष्मीबाई
- रानी लक्ष्मीबाई मराठा शासित झांसी की रानी और भारत की स्वतंत्रता संग्राम की पहली वीरांगना थीं।
- सन् 1857 भारत का प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम हुआ जिसमें लक्ष्मीबाई ने अहम भूमिका निभाई।
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रानी लक्ष्मीबाई
- अपने शौर्य से अंग्रेजों के दांत खट्टे करने व रणयज्ञ में अपने प्राणों की आहुति देने वाले योद्धाअों में वीरांगना लक्ष्मीबाई का नाम सर्वोपरी माना जाता है।
- अपने सैन्य कौशल का परिचय देते हुए अंग्रेजों से मुकाबला करने के लिए उन्होंने अपने तरीके से सेना का गठन किया।
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रानी लक्ष्मीबाई
- रानी लक्ष्मीबाई घुड सवारी और तलवारबाजी दोनों में ही निपुण थीं।
- अपने महल के बीचों बीच उन्होंने घुड सवारी के लिए अलग से स्थान बनवाया था।
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रानी लक्ष्मीबाई
- लक्ष्मीबाई के घोड़ों के नाम सारंगी, पवन, और बादल था। सन्1858 के समय किले से निकलने में घोड़े बादल की अहम भूमिका थी।
- रानी लक्ष्मीबाई में महिलाअों को सबला बनाने के लिए स्त्री सेना का गठन किया। साथ ही उन्हें घुड़सवारी व शस्त्र चलाना भी सिखाया।
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रानी लक्ष्मीबाई
- सन् 1842 में उनका विवाह झाँसी के मराठा शासित राजा गंगाधर राव नेवालकर के साथ हुआ, उस समय वह 14 वर्ष की थीं।
- सन् 1851 में रानी लक्ष्मीबाई ने एक पुत्र को जन्म दिया। परन्तु चार महीने की आयु में ही उसकी मृत्यु हो गयी।
- सन् 1853 में राजा गंगाधर राव का स्वास्थ्य खराब होने के कारण एक पुत्र गोद लिया। 21 नवम्बर 1853 को राजा गंगाधर राव की मृत्यु हो गयी।
- 17 जून 1858 को अंग्रेजी साम्राज्य की सेना के साथ संग्राम करते हुए रानी लक्ष्मीबाई रणक्षेत्र में वीरगति को प्राप्त हुईं।