जरूरी नहीं है कि जकात की रकम किसी मदरसे या मजहबी तंजीम को ही दी जाए। अगर कोई मरीज गरीब है और इलाज के लिए दवा खरीदने की हैसियत में नहीं है तो उसकी दवा खरीदवाकर भी जकात अदा की जा सकती है।
इसके अलावा ऐसा जरूरतमंद जो शर्म और लिहाज की वजह से अपनी मजबूरी नहीं बता पा रहा है। उसे भी जकात दी जा सकती है। इससे अधिक सवाब मिलेगा। उलेमा ने बताया कि जकात रकम और सामान के रूप में दी जा सकती है।
कानपुर में लोग जकात अदा करने के संबंध में रमजान हेल्प लाइन पर उलेमा से मसला पूछ रहे हैं। कुलहिंद इस्लामिक इल्मी अकादमी की अल शरिया हेल्पलाइन पर लोगों ने मरीजों को दवा दिलाकर और गरीबों को जरूरत का सामान दिलाकर जकात की अदायगी के संबंध में जानकारी ली।
इसके साथ आल इंडिया गरीब नवाज काउंसिल की माहे स्याम हेल्पलाइन पर पूछा गया कि आर्टिफिशियल ज्वैलरी पर जकात निकाली जाएगी? इस पर बताया गया कि सोना-चांदी के अलावा किसी धातु पर जकात वाजिब नहीं है।
अगर आर्टिफिशियल ज्वैलरी का व्यापार किया जाता है और जकात की शर्तें पूरी होती हैं, तभी जकात निकालना वाजिब होगा। उलेमा ने यह भी स्पष्ट किया कि शीशे, कांच की चूड़ियां जिनका इस्तेमाल जीनत के लिए किया जाता है, उन पर जकात वाजिब नहीं है।
इसके अलावा बाबपुरवा स्थित नई जामा मस्जिद में जश्न-ए-तकमील-ए-कुरान में कुरान पाक की फजीलत बयान की गई। अध्यक्षता शहर काजी मौलाना रियाज अहमद हशमती ने की।