गेरुअा लिबास पहनकर जब वाे मंच पर चढ़कर बाेलना शुरु करती हैं तो लोग ऐसे मंत्रमुग्ध होकर उनको सुनते हैं कि जैसे कोई कथावाचक कथा सुना रहा हो। कहते हैं कि गुस्सा उनकी नाक पर सवार रहता है। हम बात कर रहे हैं मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री व वर्तमान केन्द्रीय मंत्री उमा भारती की। उमा की पहचान भाजपा के तेज-तर्रार नेताओं में होती है।
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उमा भारती
उमा भारती अपने विवादित बयानाें काे लेकर अक्सर सुर्खियों में रहती हैं। हाल ही में उन्हाेंने एक बयान में कहा था मैं भगवान राम नहीं है जाे दलिताें के घर खाना खाने से पवित्र हाे जाएंगे। एेसे में हम अापकाे उमा भारती की लव स्टाेरी के बारे में बताने जा रहे हैं जिसमे संघ बाधक बन गया।
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उमा भारती
कहते हैं कि उमा भारती ने देश व समाज के लिए शादी नहीं की। इससे सवाल उठता है कि अाखिर क्याें उन्हाेंने प्रेम की बलि दे दी। इससे देश और समाज को अब तक क्या लाभ हुआ है। 29 बरसों तक आईबी की सेवा करने वाले इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व ज्वाइंट डायरेक्टर एम.के. धर ने अपनी किताब ‘ओपन सीक्रेट्स’ में लिखा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा विवाह की इजाजत न मिलने के कारण गोविंदाचार्य और उमा भारती को गहरा धक्का लगा।
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उमा भारती
इससे यह बात स्पष्ट हो जाती है कि इन प्रेमियों ने कोई त्याग नहीं किया बल्कि राजनैतिक महत्वकांक्षाओं के चलते विवाह नहीं कर पाये। अपनी किताब में एम. के. धर लिखते हैं कि उमा भारती ने कई बार उनकी पत्नी को बताया था कि वह गोविंद से शादी करना चाहती हैं। संघ के शीर्ष नेतृत्व से मंजूरी मिलने के बाद वह संन्यासिन का बाना त्याग देंगी।
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उमा भारती
उन्होंने यह भी लिखा है कि संघ के इस फैसले से उमा भारती मन ही मन दुखी हुईं और गोविंदाचार्य ने मुझे और मेरी पत्नी से कहा कि हम लोग उमा भारती को इस सदमे से बाहर निकालें। उमा का दर्द इतना बड़ा था कि वह हमारे समझाने से भी उबर नहीं सकीं। एम. के. धर अपनी किताब में लिखते हैं कि गोविंदाचार्य और उमा भारती अक्सर साथ ही उनके घर पर आते थे।
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उमा भारती
उमा भारती गाड़ी चलाकर गोविंदाचार्य को साथ लाती थीं और हम सब लोग साथ में खाना खाते थे गपशप भी करते थे। इसके अलावा 30 जून 2008 को उमा भारती ने भोपाल के रविन्द्र भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में खुद कहा था कि गोविंदाचार्य उनसे शादी करना चाहते थे। इस शादी का प्रस्ताव स्वयं लालकृष्ण आडवाणी लेकर आए थे। उनके बड़े भाई स्वामी प्रसाद लोधी ने गोविंदाचार्य को नापसंद कर दिया था।
मंचासीन गोविंदाचार्य के सामने उमा भारती ने कहा था कि इस सभागार में मेरे लिए एक अद्भुत संयोग बन गया है। मेरे जीवन को जिन-जिन लोगों ने संवारा है , वे सब इस सभागार में मौजूद हैं। गोविंदाचार्य से मेरे संबंध रहे हैं। मुझे उनसे मिलने के लिए केदारनाथ जाने की जरूरत नहीं है। मैं उनसे दिल्ली में भी मिलती हूं। वह भोपाल में भी मुझसे मिलते हैं।