केंद्रीय विद्यालय में दीप प्रज्वलित करना बछेंद्री पाल
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नमामि गंगे मिशन पर निकलीं एवरेस्ट पर चढ़ने वाली भारत की पहली महिला बछेंद्री पाल ने स्कूलों में बच्चों को स्वच्छता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आप लोग अपने-अपने घरों को स्वच्छ बनाएं, इसके बाद स्वच्छता अभियान की जरूरत नहीं पड़ेगी। देश अपने आप स्वच्छ हो जाएगा। उनके सहयोगी ने कचरे का उपयोग करने के तरीके बताए।
यूपी के फर्रुखाबाद जिले में बछेंद्री पाल शनिवार को सबसे पहले फतेहगढ़ कैंट स्थित केंद्रीय विद्यालय पहुंचीं। उन्होंने बच्चों को संदेश दिया कि वह 1993 में महिलाओं के एक ग्रुप के साथ एवरेस्ट पर गईं थीं। उस समय वहां से 500 किलो कचरा बटोर कर लाईं थी। जब मैं एवरेस्ट से पांच सौ किलो कचरा ला सकती हूं तो क्या आप लोग अपने घरों से कचरा साफ नहीं कर सकते।
इस ग्रुप में आठ ऐसे लोग शामिल हैं जो एवरेस्ट फतह कर चुके हैं
बछेंद्री पाल
उनके सहयोगी पवन ने बताया कि हम चालीस लोगों का ग्रुप गंगा सफाई का अभियान हरिद्वार से चलाते आ रहे हैं। इस ग्रुप में आठ ऐसे लोग शामिल हैं जो एवरेस्ट फतह कर चुके हैं। इसके अलावा चार आईआईटी के पास आउट इंजीनियर भी शामिल हैं। उन्होंने बच्चों को जैविक और अजैविक कूड़े में फर्क होने के साथ ही कूड़े का उपयोग कैसे कर सकते हैं इसकी जानकारी भी दी।
बछेंद्री पाल ने विद्यालय में सात पौधे भी रोपे। इसके बाद वह जीजीआईसी, एमआईसी, क्रिश्चियन इंटर कॉलेज और सोता बहादुरपुर प्राथमिक विद्यालय गईं व बच्चों को स्वच्छता का संदेश दिया। शाम को उन्होंने टीम के साथ गंगा की सफाई की। इससे पहले सुबह पांचाल घाट पर गंगा तट तक प्रभात फेरी निकाली गई। वहां दीप प्रज्वलित किया गया।
बच्चों में दिखा सेल्फी का क्रेज
बछेंद्री पाल को देखकर बच्चों में सेल्फी का जबरदस्त क्रेज दिखा। स्कूल में जहां भी बछेंद्री पाल गईं, बच्चे उनके साथ सेल्फी लेने को दौड़ पड़े। आलम यह था कि स्कूल से निकलने के बाद जब वह कार से जा रही थीं, तब भी रोड पर कार रोक कर उन्होंने बच्चों के साथ फोटो खिंचवाई। कई बच्चों ने उनसे ऑटोग्राफ भी लिया।
सिरे से नकारते हुए कहा कि मै न ही राजनीति में जाना चाहती हूं
बछेंद्री पाल
केंद्रीय विद्यालय में डीएम का होता रहा इंतजार, जीजीआईसी पहुंची
केंद्रीय विद्यालय में कार्यक्रम के दौरान तीन-चार बार कार्यक्रम के संयोजक ने बताया कि डीएम मोनिका रानी स्कूल में आ रहीं हैं। यह सिलसिला बछेंद्री पाल के आने से पहले से शुरू हुआ और बाद तक चलता रहा, लेकिन डीएम स्कूल में नहीं पहुंची। बाद में वह जीजीआईसी में कार्यक्रम में पहुंची। वहां पर उन्होंने बछेंद्री पाल का स्वागत किया, साथ ही पॉलिथीन छोड़ने के लिए स्कूली बच्चों की तारीफ भी की।
बछेंद्री पाल से पूछा गया कि मिशन नमामि गंगे के जरिए कहीं वह राजनीति में जाने की तैयारी तो नहीं कर रही हैं। इसे उन्होंने सिरे से नकारते हुए कहा कि मै न ही राजनीति में जाना चाहती हूं। न ही यह मेरे बस की है। मेरा जन्म उत्तर काशी के एक गांव में हुआ था। वहां से नीचे गंगा नदी दिखती थी। बचपन से गंगा मां, धरती मां व भारत मां सुनती आ रहीं हूं। इसीलिए इस अभियान के लिए वर्षों से काम कर रही हूं।
गंगा के लिए 22 हजार करोड़ का बजट
नमामि गंगे के डा. संदीप बेहरा ने बताया कि नमामि गंगे मिशन का बजट 22 हजार करोड़ है। अब तक हम लोग चार हजार करोड़ रुपये खर्च कर चुके हैं। यह बजट 15 सालों के लिए है। गंगा को तुरंत साफ नहीं किया जा सकता है। प्रतिदिन करीब 35 करोड़ लोग गंगा नदी में गंदगी डालते हैं। अब तक 1600 एमएलडी के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जा चुके हैं। दो हजार एमएलडी के प्लांट अगले साल नवंबर तक बन कर तैयार हो चुके हैं। इसके अलावा गंगा किनारे बने कारखानों को भी चिह्नित कर उन्हें बंद करने के नोटिस जारी किए जा रहे हैं।