केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में जनपद के 14,847 लाभार्थियों के दस्तावेजों में गड़बड़ी मिली है। इनमें से 9,632 किसानों के आधार कार्ड वैलिड ही नहीं हैं, जबकि 5,215 किसानों का नाम दर्ज आधार कार्ड संख्या के नाम से मेल नहीं खा रहा है।
पूरे प्रदेश मेें किसान सम्मान निधि के लाभार्थियों की जांच के आदेश होने के बाद अब जिले में भी खलबली मच गई है। लाभ पाने वाले जिन किसानों का कोई सुराग नहीं मिल रहा है उन सभी के बैंक खातों में तीन-तीन किश्तें भेजी जा चुकी हैं।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत सात श्रेणी के लोगों को छोड़कर सभी किसानों को लाभांवित किए जाने का नियम है। योजना में जिले में 6,65,293 किसानों को लाभांवित किया गया है। विभाग से जुड़े विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक जिले में 14,847 लाभार्थी ऐसे हैं, जिनके बैंक खातों में किसान सम्मान निधि की तीन-तीन किश्तें भेजी गईं, लेकिन जब आधार अनिवार्य कर दिया गया, तो इनकी कोई खोज खबर नहीं मिल पा रही है।
इनमें से 5215 लाभार्थी ऐसे हैं, जिन्होंने आधार कार्ड का नंबर तो अपडेट कराया, लेकिन यह उनके बैंक खाता में दर्ज नाम और खतौनी के नाम से नहीं मिल रहा है। इसी तरह 9632 लाभार्थी ऐसे हैं, जिनके आधार वैलिड नहीं हैं, यानि गलत आधर नंबर डालकर लाभ ले लिया गया।
भेजे गए हैं नौ करोड़ रुपये
किसान सम्मान निधि की एक किश्त दो हजार रुपये की होती है। अमूमन हर चार माह पर एक किश्त भेजी जाती है, यानि पांच सौ रुपये हर माह। जिन लाभार्थियों का कोई पता नहीं चल रहा है उनकी संख्या 14,847 है। इन सभी के खातों में तीन तीन किश्त यानि 6-6 हजार रुपये भेजे गए हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो आठ करोड़ 90 लाख 82 हजार रुपये संदिग्ध पात्रों के खातों में भेजे गए हैं।
926 लाभार्थियों के आधार कार्ड सस्पेंड भी
अमर उजाला के पास उपलब्ध अभिलेखों के मुताबिक 926 ऐसे लाभार्थी भी हैं। जिनके खातों में किसान सम्मान निधि की तीन-तीन किश्तें भेजी गई हैं। इनके आधार कार्ड सस्पेंड चल रहे हैं। मतलब यह कि आधार कार्ड तो बनाए गए, लेकिन उनमें कोई तकनीकी खामी आ गई, हालांकि यह किसान फिलहाल संदिग्ध नहीं माने जा रहे हैं। तकनीकी खामी के कारण इन किसानों के साथ यह दिक्कत आई है।
672 मिले अपात्र, 222 ने खुद वापस किया सम्मान
जनपद में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लिए चयनित लोगों में से 222 बड़े दिलवाले और स्वाभिमानी निकले। इन लोगों के बैंक खाते में सम्मान निधि पहुंची, तो खुद ही उपनिदेशक क़ृषि से संपर्क कर खुद को उक्त योजना के लिए अपात्र बताया। इन सभी ने सम्मान निधि के तहत मिली राशि को सरेंडर (वापस) कर दिया। इससे इतर उपजिलाधिकारियों से भी सत्यापन कराया गया था और तब 672 लोग अपात्र पाए गए थे। इन सभी के बैंक खातों में अब कोई किश्त नहीं जा रही है।
अमर उजाला ने किया था खेल का खुलासा,दबाव में रोकी गई थी जांच
प्रदेश सरकार ने किसान सम्मान निधि पाने वाले किसानों की जांच कराने का फैसला भले ही अब लिया हो, लेकिन अमर उजाला ने 29 सितंबर 2019 के अंक में ही किसान सम्मान निधि में हो रहे फर्जीवाड़े का खुलासा कर दिया था। तब अमर उजाला ने स्पष्ट तौर पर लिखा था कि जिनके पास एक बिस्वा भूमि भी नहीं है उन्हें भी किसान सम्मान निधि दी जा रही है।
इस पर तत्कालीन पुलिस अधीक्षक आलेाक प्रियदर्शी ने क्राइम ब्रांच और स्वाट टीम को लगाकर जांच भी शुरू कराई थी। जांच में पुलिस को किसान सम्मान निधि में जन सेवा केंद्रों और तहसीलों में लगाए गए ऑपरेटरों के जरिए सुनियोजित गड़बड़ी किए जाने के पुख्ता प्रमाण मिले थे। हालांकि इसके बाद उन्हीं दिनों जनपद में तैनात एक अधिकारी के इशारे पर पूरी जांच जहां की तहां छोड़ दी गई थी।
राजस्व विभाग की लापरवाही बनी कृषि विभाग की बदनामी का सबब
हकीकत यह है कि अधिक से अधिक किसानों को सम्मान निधि दिलाकर जिले को पूरे प्रदेश में अव्वल साबित करने की होड़ में सारा खेल हो गया। अधिकांश फीडिंग उपजिलाधिकारियों की देखरेख में हुईं। तहसीलों में कराई गई फीडिंग को आंख बंद कर संस्तुति दे दी गई। सत्यापन के नाम पर सिर्फ औपचारिकता ही पूरी की गई। खास बात यह है कि योजना की शुरूआत के दौरान आधार लगाने की अनिवार्यता नहीं थी और इसी की आड़ लेकर जमकर खेल किया गया। कुल मिलाकर राजस्वव् विभाग की लापरवाही अब कृषि विभाग की बदनामी का सबब बन रही है।
एक नजर आंकड़ों पर
- जनपद में किसान सम्मान निधि के लिए फीड किए गए नामों की संख्या- 5,44,229
- किसान सम्मान निधि के अंतर्गत पहली किस्त पाने वाले किसानों की संख्या - 6,65,293
- किसान सम्मान निधि के अंतर्गत दो किस्त पा चुके किसानों की संख्या - 6,44,452
- किसान सम्मान निधि के अंतर्गत तीन किस्त पा चुके किसानों की संख्या - 6,16,1866
- किसान सम्मान निधि के अंतर्गत चार किस्त पा चुके किसानों की संख्या - 5,60,668
- किसान सम्मान निधि के अंतर्गत पांच किस्त पा चुके किसानों की संख्या - 4,95,682
- किसान सम्मान निधि के अंतर्गत छह किस्त पा चुके किसानों की संख्या - 3,57,315
ऐसे दिया जाता है लाभ
किसान को एक घोषणा पत्र देना होता है कि वह योजना के लिए पात्र है। घोषणा पत्र के साथ खतौनी की नकल, आधार कार्ड, बैंक पासबुक की छायाप्रति देनी होती है। इन घोषणा पत्रों को उपजिलाधिकारियों की निगरानी में फीड कराया जाता है। फीड कराने के बाद कृषि विभाग के अधिकारी सूची को राज्य सरकार के माध्यम से आनलाइन केंद्र सरकार को भेज देते हैं।
इनको नहीं दिया दी जा सकती किसान सम्मान निधि
- पूर्व/वर्तमान संवैधानिक पद धारक
- पूर्व मंत्री, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक, पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष, पूर्व जिपं अध्यक्ष, पूर्व ब्लाक प्रमुख
- मंत्री, सांसद, विधायक, नगर पालिकाध्यक्ष, जिपं अध्यक्ष, ब्लाक प्रमुख
- आयकर का भुगतान करने वाले लोग
- सभी ऐसे पेंशनधारक जो 10 हजार रुपये से अधिक पेंशन पाते हैं (चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को छोड़कर)
- सरकारी कर्मचारी (चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को छोड़कर)
- चिकित्सक, अभियंता, अधिवक्ता, सीए, आर्किटेक्ट जो संबंधित पेशे के लिए पंजीकरण करने वाली संस्था में पंजीकृत हैं
जिम्मेदारों की सुनिए
पीएम किसान सम्मान निधि योजना के नोडल अधिकारी उपनिदेशक कृषि डॉ. आशुतोष मिश्र ने बताया कि 9632 किसानों के आधार कार्ड वैलिड नहीं हैं। अब इनके खाता संख्या के जरिए संबंधित बैंकों से संपर्क कर इनके पते खोजे जा रहे हैं। इस संबंध में जिला प्रबंधक अग्रणी बैंक को पत्र भेजा गया है। पते मिलते ही राजस्व विभाग के कर्मचारियों से सहयोग लेकर आधार अपडेट कराए जाएंगे। जिन किसानों के आधार, बैंक खाता के नाम और खतौनी के नाम में अंतर है उन्हें भी खोजा जा रहा है। 926 किसानों के आधार कार्ड सस्पेंड हैं उन्हें भी अवगत कराया गया है कि आधार ठीक करा लें। उपनिदेशक ने बताया कि आधार के सत्यापन के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।