केएफसीएल डायरेक्टर खुदकुशी प्रकरण
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कानपुर फर्टिलाइजर एंड केमिकल लिमिटेड (केएफसीएल)के निदेशक सुनील जोशी की मौत के बाद अब उनके करीबी ठेकेदार और कर्मचारियों पर चेयरमैन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। घटना के दूसरे दिन गुरुवार को ही बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग बुलाई गई जिसमें सुनील केचहेते ठेकेदार सुशील तिवारी के सभी टेंडर रद्द कर दिए गए।
सूत्रों का कहना है कि जिस स्क्रैप घोटाले में सुनील जोशी का नाम सामने आ रहा था, उसका ठेका भी सुशील के पास था। कंपनी प्रबंधन अब सुशील के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी में है।
केएफसीएल के निदेशक सुनील जोशी 2012 में सतना सीमेंट फैक्टरी से ट्रांसफर होकर आए थे।
उनके साथ ही ठेकेदार सुशील तिवारी भी यहां पहुंचा था। धीरे-धीरे उसे कंपनी के ज्यादातर ठेके मिलते गए। कंपनी में मजदूरों से लेकर कर्मचारियों की आउटसोर्सिंस तथा स्क्रैप, कैंटीन और निर्माण संबंधी करोड़ों के ठेके उसी के पास थे।
ज्योतिष की जानकारी रखने वाले सुशील को सुनील जोशी गुरु कहते थे। सूत्रों के मुताबिक कुछ महीने पहले कंपनी से करोड़ों रुपये का स्क्रैप बेचा गया था जिसका ठेका सुशील को मिला था। ऑडिट में इस बिक्री में वित्तीय अनियमितता पाई गई थी। इसकी विभागीय जांच हुई तो सुनील जोशी और सुशील का हाथ सामने आया। इसे लेकर सुनील जोशी का प्रबंध से विवाद शुरू हो गया था।
ठेकेदार के खातों से खुलेगा राज
निदेशक सुनील जोशी की मौत के बाद सुशील को फंसने का डर सताने लगा। इसीलिए वह भागने की तैयारी में था। इसकी भनक लगते ही बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग बुला ली गई। इसमें सुशील के सभी ठेकों को रद्द कर उसके संपर्क वाले कर्मचारियों को कंपनी से निकालने का फैसला लिया गया। उसके सभी भुगतान पर भी रोक लगा दी गई। खातों से लेनदेन पर प्रतिबंध के लिए संबंधित बैंकों को पत्र भेज दिए गए हैं। कंपनी के सूत्रों का कहना है कि सुशील के कुछ खातों की जानकारी किसी को नहीं है। घोटाले की रकम इन्हीं खातों में जमा होने की चर्चा है। इसका पता लगाने के लिए अधिकारी पूछताछ कर रहे हैं। इससे कई राज खुलने की उम्मीद है।