कानपुर। केडीए के केशवनगर स्थित तीन प्लाटों पर अवैध कब्जे हटाने का अभियान शुक्रवार को तीसरी बार फिर टल गया। जनसुनवाई में मामला दर्ज होने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से इन प्लाटों से कब्जा हटाने के आदेश जारी हुए हैं। बीते सोमवार को भी कब्जेदारों की ओर से दो दिन का समय मांगने पर अभियान टाल दिया गया था। इसके बाद 19 सितंबर को अभियान की डेट तय की गई थी। शुक्रवार को केडीए का दस्ता तैयारी के साथ हनुमंत विहार थाने में मौजूद रहा लेकिन मजिस्ट्रेट के राज्यपाल ड्यूटी पर होने के कारण फिर अभियान टल गया।
डब्ल्यू ब्लाक केशवनगर में भूखंड संख्या 439, 439 बी और 440 में अवैध कब्जों की शिकायत स्थानीय निवासियों ने आईजीआरएस में की थी। इस पर मुख्यमंत्री कार्यालय से 23 जुलाई 2025 को कब्जा हटाने के आदेश जारी हुए थे। इस पर केडीए ने 27 अगस्त 2025 को अतिक्रमण हटाने की तारीख तय की थी। इस दिन मजिस्ट्रेट की व्यस्तता के कारण अभियान न चल सका। इसकी जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय को देते हुए केडीए सचिव अभय कुमार पांडेय ने अभियान के लिए 15 सितंबर की तारीख तय की थी।
15 सितंबर को अभियान के दौरान कब्जेदारों को मानवीय आधार पर खुद अतिक्रमण हटाने के लिए एसीएम प्रथम भगत सिंह ने दो दिन का समय दिया था। इसके बाद 19 सितंबर को कब्जे हटाने की डेट तय हुई थी। करीब 40 मजदूरों और चार जेसीबी लेकर केडीए अधिकारी हनुमंत विहार थाने पहुंच गए। काफी देर इंतजार के बाद जब मजिस्ट्रेट नहीं पहुंचे तो केडीए अधिकारियों ने उन्हें फोन किया। इस पर उन्होंने राज्यपाल की ड्यूटी पर होने और अभियान के लिए दो दिन बाद की डेट लगाने के लिए कहा। इसके चलते अभियान टाल दिया गया। केडीए सचिव अभय कुमार पांडेय ने बताया कि मजिस्ट्रेट के न आने के कारण अभियान स्थगित करना पड़ा है। जल्द ही नई डेट लगाई जाएगी।
प्लाट पर कब्जा करने वाले लोग केडीए की कार्रवाई के खिलाफ सांसद रमेश अवस्थी से मिलने पहुंचे। इस पर सांसद ने कार्रवाई रोकने के लिए केडीए अधिकारियों से कहा। दूसरी ओर बार-बार अभियान टलने से कब्जे शिकायत करने वाले स्थानीय नागरिकों ने अधिकारियों की मिलीभगत से कब्जा होने की बात कही। वहीं कब्जा किए लोगों ने फिर दोहराया कि उन्हें खुद को अधिकारी बताने वाले लोगों ने 30-30 हजार रुपये देकर कब्जा मिलने का आश्वासन दिया है। सांसद का कहना है कि यहां पर जो भी लोग रह रहे हैं केडीए वीसी से उन सभी को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने के बाद ही यहां से हटाने की बात कही है।