जलसंकट, तालाब खुदवाने, बचाने के शोर के बीच कानपुर में सरकारी विभागों की एक शर्मनाक करतूत सामने आई है। शहर में 66 तालाबों की जमीन केडीए, यूपीएसआईडीसी, आवास विकास परिषद ने कब्जा कर यहां कालोनियां विकसित कर दी हैं। अब केडीए ही तालाबों का सर्वे करवा रहा है ताकि वर्षा जल संचयन किया जा सके।
सवाल यह है कि जब 66 तालाबों की जमीन पर बड़ी-बड़ी कालोनियां- मकान खड़े हैं तो इनको कौन हटा सकता है। केडीए सचिव एसपी सिंह ने तालाबों की सूची महापौर को भिजवा दी है। कुओं का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है। सर्वे में अतिक्रमण से खाली मिले तालाबों की साफ-सफाई केडीए कराएगा।
महापौर प्रमिला पांडेय ने 10 जून 2019 को समीक्षा बैठक में केडीए अधिकारियों को वर्षा जल संचयन के लिए शहरी क्षेत्र में स्थित पुराने तालाबों और कुओं की साफ-सफाई कराने के निर्देश दिए थे। महापौर के प्रस्ताव पर जिला योजना समिति की बैठक में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी शहरी क्षेत्र के तालाबों के रखरखाव की जिम्मेदारी केडीए को सौंपने पर सहमति जताई थी। इसके बाद केडीए ने तालाबों का सर्वे कराया।
केडीए की पुरानी सीमा के 86 गांवों में स्थित 312 तालाबों की सूची प्राधिकरण अधिकारियों ने तैयार की है। 134 तालाबों पर बसावट (कब्जे) पाई गई है। 68 तालाबों की जमीन पर पक्के मकान खड़े हैं। 50 तालाबों पर आंशिक रूप से कब्जे हैं। खास बात तो यह है कि 66 तालाबों की जमीन प्राधिकरण, यूपीएसआईडीसी, आवास विकास परिषद की योजनाओं में इस्तेमाल कर ली गई है। 122 तालाबों की जमीन पूरी तरह से खाली मिली है।
नौबस्ता-देहली सुजानपुर में सबसे ज्यादा कब्जे
केडीए की नौबस्ता और देहली सुजानपुर योजना में सबसे ज्यादा तालाबों की जमीन पर कब्जा मिला है। नौबस्ता में 23 और देहली सुजानपुर में 18 तालाब चिह्नित किए गए हैं। नौबस्ता के 14 और देहली सुजानपुर के 10 तालाबों की जमीन पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया गया है। नौबस्ता के बाकी नौ तालाबों की जमीन पर योजनाएं बसा दी गईं। चंदारी के 25 तालाबों में नौ पर पूरी तरह से कब्जा है और नौ पर योजनाएं बसी हैं। यहां छह तालाब पूरी तरह से खाली मिले हैं। पनकी गंगागंज में पांच, अहिरवां में चार तालाबों पर कब्जे हैं।
कुलगांव में 10 तालाब खाली
चकेरी के कुलगांव में 10, सनिगवां में नौ, उचटी में पांच, रूमा में छह, कल्याणपुर के बारासिरोही में 11 तालाबों की जमीन खाली पड़ी है।