माई सिटी रिपोर्टर आदर्श त्रिपाठी कानपुर। शहर की गंगा जमुनी तहजीब की एक और मिसाल बृहस्पतिवार को देखने को मिली।जब छावनी क्षेत्र के नरोना रोड निवासी 60 वर्षीय कौशल प्रसाद का अंतिम संस्कार करने के लिए हिंदू-मुस्लिम मजहब की दीवार तोड़कर साथ आ खड़े हुए। दोनों मजहब के लोगों ने मिलकर कौशल प्रसाद की शव यात्रा निकाली और उन्हें हिंदू रीति रिवाज के मुताबिक दफनाया। ऐसा ही एक नजारा बुधवार को बाबूपुरवा के मुंशीपुरवा में देखने को मिला था। जहां हिंदू परिवार की वृद्धा का निधन होने के बाद मुस्लिम भाइयों ने राम नाम सत्य कहते हुए अर्थी को कंधा देकर हिंदू रीति रिवाज का पालन करते हुए शव का अंतिम संस्कार कराया था। नरोना रोड निवासी कौशल प्रसाद रिक्शा चलाकर गुजारा करते थे। ढाई वर्ष पहले उनकी पत्नी का निधन हो चुका था। उनके बेटे संतोष की भी मृत्यु हो चुकी है। बेटी कमलेश्वरी की शादी सीतापुर में हुई है। बीमारी के चलते कौशल प्रसाद का बृहस्पतिवार को निधन हो गया। लाक डाउन के कारण कमलेश्वरी सीतापुर से नहीं आ पाई। ऐसे में क्षेत्र के हिंदू मुस्लिम ने मिलकर भाईचारे की मिसाल पेश करते हुए रीति रिवाज से अंतिम संस्कार किया। क्षेत्र के राधेश्याम, मोहम्मद असलम, मोहम्मद सुहानी, मोहम्मद अजमत उल्लाह, रामत कलाम, ज्ञानू, मुन्ना, मोहम्मद कलाम, भूरे आदि ने अर्थी को कंधा दिया। राम नाम सत्य कहते हुए शव को डबका घाट जाजमऊ के पास दफनाया।