कोरोना वायरस के चलते शहर के डेढ़ लाख से अधिक केंद्रीय तथा राज्य कर्मचारियों व पेंशनरों को झटका मिला है। सरकार ने महंगाई भत्ता बढ़ाने पर रोक लगा दी है। सरकार के आदेश के अनुसार 18 महीने तक कर्मचारियों के महंगाई भत्ते पर रोक रहेगी। इस निर्णय से शहर के सरकारी कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों और अफसरों को उनकी आय की स्लैब के अनुसार 5 से 25 हजार रुपये वार्षिक फिलहाल नहीं मिलेगा। इस पर शहर के कर्मचारियों ने मिलीजुली प्रतिक्रिया दी है। ज्यादातर कर्मी इस फैसले के साथ हैं वहीं कुछ ने नाराजगी जताई है।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के संरक्षक भूपेश अवस्थी ने बताया कि सरकार का यह निर्णय राज्य कर्मचारियों पर भी लागू होगा। केंद्र सरकार हर साल जनवरी और जुलाई महीने में महंगाई के अनुपात में महंगाई भत्ते की घोषणा करती है। सरकार ने इस बार होली के दौरान ही महंगाई भत्ते में 4 फीसदी बढ़ोतरी की घोषणा की थी। इसके बाद कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 17 फीसदी से बढ़कर 21 फीसदी हो गया था। लेकिन अब यह बढ़ा भत्ता भी नहीं मिल सकेगा। राज्य कर्मचारी सरकार के साथ हैं। कर्मचारी कल्याण समन्वय समिति उप्र के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेश कुमार शुक्ला ने बताया कि शहर में 46 हजार से अधिक अकेले सीजीएचएस के पेंशनर हैं। इसके अलावा अन्य कई हजार पेंशनर हैं जिन्हें इसका लाभ नहीं मिलेगा। कहा कि कर्मचारी संगठन इस संकट के समय में सरकार के साथ खड़े हैं।
केंद्रीय कर्मचारी शैलेंद्र दीक्षित ने कहा कि सरकारी कर्मचारी कोरोना संकट के बीच अपनी जान जोखिम में डालकर कार्य कर रहा है। एक दिन का वेतन भी सरकार को दे चुका है। अब 18 महीने के लिए महंगाई भत्ते को रोकने का आदेश कर्मचारियों के साथ नाइंसाफी है।
केंद्रीय कर्मचारी शिव कुमार यादव ने कहा कि कोरोना संकट में सरकार के साथ खड़े हैं। डेढ़ साल महंगाई भत्ता नहीं मिलेगा, इसका असर जरूर पड़ेगा लेकिन सभी लोग सरकार का सहयोग करेंगे।