देश की रक्षा में 2005 में अपने प्राणों की आहुति देने वाले बाबूपुरवा निवासी मेजर सलमान के परिजन 15 साल बाद भी सरकार की ओर से किए गए वादे के पूरे होने की राह तक रहे हैं। सरकार ने गैस एजेंसी और नगर निगम ने प्लाट देने का एलान किया था।
विभागों के सैकड़ों चक्कर लगाने के बाद भी दोनों ही घोषणाएं बस जुबानी बनकर रह गई हैं। मेजर सलमान कुपवाड़ा ऑपरेशन में आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए थे। उनके मरणोपरांत शौर्य चक्र उनके परिजनों को दिया गया था।
सलमान के पिता मुश्ताक अहमद खान और बड़े भाई इकरार अहमद खान कहते हैं कि सेना की ओर से उनकी हर संभव मदद की गई। आज भी सलमान की बटालियन से जुड़े अधिकारी फोन करते हैं। हालांकि सरकार ने जो घोषणा की थी वह अभी तक पूरी नहीं हुई।
तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री मणिशंकर अय्यर ने गैस एजेंसी या पेट्रोल पंप देने की घोषणा की थी। उन लोगों ने गैस एजेंसी के लिए आवेदन किया था। दो बार सेलेक्ट भी हुए पर अभी तक एजेंसी नहीं मिली। तत्कालीन मेयर ने महाबलीपुरम में आधे दाम पर 200 वर्ग गज का प्लॉट देने की बात कही थी।
15 साल बाद बस कागजों में ही कार्यवाही चल रही है। वहां भेजे जाने वाले पत्रों का जवाब तक नहीं आता है। इकरार अहमद ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे का नाम भी सलमान रखा है। पहले पूरा परिवार उसे सेना में भेजना चाहता था, लेकिन अब वो नहीं चाहते कि बेटा सेना में जाए।