रसायनों के क्षेत्र में कुछ बाजारों में मांग बढ़ी
वहीं संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, पोलैंड, मलयेशिया और मैक्सिको से मिले ऑर्डरों ने कुछ राहत दी। चमड़े के वस्त्रों और अन्य चमड़ा लाइनों की पश्चिमी बाजारों में मांग कम हुई है। गैर-चमड़ा उत्पादों और प्लास्टिक उत्पादों की मांग में भी कमी दर्ज की गई। अन्य चमड़ा उत्पादों के निर्यात में भी लगभग नौ फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इंजीनियरिंग और अन्य वस्तुओं की मांग में वृद्धि हुई है। रसायनों के क्षेत्र में कुछ बाजारों में मांग बढ़ी।
खाड़ी देशों में पहुंच चुकी है युद्ध की आंच
मौजूदा समय में निर्यातकों के सामने महंगा माल भाड़ा, आर्डरों के न मिलने की चुनौतियां हैं। युद्ध के कारण भाड़ा और बीमा जोखिम प्रीमियम बढ़ गया है। अमेरिकी टैरिफ के कारण यहां पर निर्यात में कमी दर्ज की गई है। यूरोप के देशों में महंगाई और लंबे समय से चल रहे रूस-यूक्रेन का असर है। पिछले वर्ष से इस बार निर्यात में कुल 17.6 फीसदी की गिरावट आई है। खाड़ी देशों में अमेरिका-ईरान युद्ध की आंच पहुंच चुकी है।
पिछले साल और इस बार की स्थिति (करोड़ में)
निर्यात होने वाले उत्पाद 2025-26 2026-27
सैडलरी और हारनेस 560 359
बेल्ट, पर्स और बैग 102 70
फिनिश्ड लेदर 502 350
लेदर फुटवियर 502 450
लेदर गुड्स, स्किन हाइड 602 450
युद्ध और अमेरिकी टैरिफ के कारण अनिश्चितता का माहौल है। असर निर्यात में गिरावट के रूप में दिख रहा है। यूरोप के बाजार में भी अस्थिरता आ रही है। इस समय सबसे ज्यादा काम होता था, लेकिन उद्योग चुनौतियों से जूझ रहे हैं। -यादवेंद्र सचान, क्षेत्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद व बेल्ट-पर्स कारोबारी
सैडलरी और हारनेस के निर्यात में कमी दर्ज हुई है। युद्ध के कारण यूरोप, अमेरिका और खाड़ी देशों के बाजारों पर असर है। शिपिंग कंपनियाें ने इतने दाम बढ़ा दिए हैं कि निर्यात करना बेहद महंगा हो गया है। विदेशी खरीदारों का रुख भी अच्छा नही है। -असद इराकी, पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद व सैडलरी कारोबारी
मौजूदा समय में अमेरिका-ईरान तनाव फिर से बढ़ गया है। कच्चा माल, शिपिंग कंपनियों का मालभाड़ा 15 से 20 प्रतिशत बढ़ चुका है। यूरोप, अमेरिका, ओशियाना रीजन में फुटवियर की मांग घटी है। -जावेद इकबाल, पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद व फुटवियर कारोबारी