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एक्सक्लूसिव: कानपुर का निर्यात 591 करोड़ रुपये घटा, 17.6% की गिरावट दर्ज, युद्ध और टैरिफ का असर, पढ़ें रिपोर्ट

Thu, 10 Sep 2026 12:16 PM IST
Himanshu Awasthi अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: वैश्विक मंदी, अमेरिकी टैरिफ और अमेरिका-ईरान तनाव के कारण कानपुर के निर्यात में 591 करोड़ (17.6%) की भारी गिरावट आई है। सैडलरी और लेदर फुटवियर उत्पाद सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, जबकि महंगे मालभाड़े ने निर्यातकों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
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जावेद इकबाल, असद इराकी और यादवेंद्र सचान - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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पिछले वर्ष निर्यात में रिकार्ड बनाने वाले कानपुर को इस बार तगड़ा झटका लगा है। शहर के निर्यात में करीब 591 करोड़ की गिरावट आई है। 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल से जून) में कुल 3359 करोड़ का निर्यात हुआ था, जबकि 2026-27 (अप्रैल से जून) में घटकर 2768 करोड़ का निर्यात हो गया। यह स्थिति अमेरिका के साथ टैरिफ चुनौती, रूस-यूक्रेन और अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से हुई है। क्रिसमस और नए साल से निर्यात के आर्डर मिलने की संभावना जताई जा रही है।

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फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गनाइजेशन (फियो) के उत्तर प्रदेश प्रमुख आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की पहली तिमाही रिपोर्ट आई है। चमड़े के जूते-चप्पलों के निर्यात में लगभग 11 फीसदी की कमी दर्ज हुई है। ब्रिटेन और कनाडा में मांग कमजोर होने के कारण इस क्षेत्र को नुकसान हुआ। सैडलरी और हार्नेस उत्पादों में लगभग 19 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। ब्रिटेन, नीदरलैंड, चिली और अमेरिका जैसे मुख्य बाजारों में मांग कमजोर रही।

रसायनों के क्षेत्र में कुछ बाजारों में मांग बढ़ी
वहीं संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, पोलैंड, मलयेशिया और मैक्सिको से मिले ऑर्डरों ने कुछ राहत दी। चमड़े के वस्त्रों और अन्य चमड़ा लाइनों की पश्चिमी बाजारों में मांग कम हुई है। गैर-चमड़ा उत्पादों और प्लास्टिक उत्पादों की मांग में भी कमी दर्ज की गई। अन्य चमड़ा उत्पादों के निर्यात में भी लगभग नौ फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इंजीनियरिंग और अन्य वस्तुओं की मांग में वृद्धि हुई है। रसायनों के क्षेत्र में कुछ बाजारों में मांग बढ़ी।

खाड़ी देशों में पहुंच चुकी है युद्ध की आंच
मौजूदा समय में निर्यातकों के सामने महंगा माल भाड़ा, आर्डरों के न मिलने की चुनौतियां हैं। युद्ध के कारण भाड़ा और बीमा जोखिम प्रीमियम बढ़ गया है। अमेरिकी टैरिफ के कारण यहां पर निर्यात में कमी दर्ज की गई है। यूरोप के देशों में महंगाई और लंबे समय से चल रहे रूस-यूक्रेन का असर है। पिछले वर्ष से इस बार निर्यात में कुल 17.6 फीसदी की गिरावट आई है। खाड़ी देशों में अमेरिका-ईरान युद्ध की आंच पहुंच चुकी है।

पिछले साल और इस बार की स्थिति (करोड़ में)

निर्यात होने वाले उत्पाद        2025-26       2026-27
सैडलरी और हारनेस               560              359
बेल्ट, पर्स और बैग                102               70
फिनिश्ड लेदर                       502              350
लेदर फुटवियर                      502              450
लेदर गुड्स, स्किन हाइड         602              450

युद्ध और अमेरिकी टैरिफ के कारण अनिश्चितता का माहौल है। असर निर्यात में गिरावट के रूप में दिख रहा है। यूरोप के बाजार में भी अस्थिरता आ रही है। इस समय सबसे ज्यादा काम होता था, लेकिन उद्योग चुनौतियों से जूझ रहे हैं।  -यादवेंद्र सचान, क्षेत्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद व बेल्ट-पर्स कारोबारी

सैडलरी और हारनेस के निर्यात में कमी दर्ज हुई है। युद्ध के कारण यूरोप, अमेरिका और खाड़ी देशों के बाजारों पर असर है। शिपिंग कंपनियाें ने इतने दाम बढ़ा दिए हैं कि निर्यात करना बेहद महंगा हो गया है। विदेशी खरीदारों का रुख भी अच्छा नही है।  -असद इराकी, पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद व सैडलरी कारोबारी
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मौजूदा समय में अमेरिका-ईरान तनाव फिर से बढ़ गया है। कच्चा माल, शिपिंग कंपनियों का मालभाड़ा 15 से 20 प्रतिशत बढ़ चुका है। यूरोप, अमेरिका, ओशियाना रीजन में फुटवियर की मांग घटी है।  -जावेद इकबाल, पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद व फुटवियर कारोबारी
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