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Kanpur Zoo: पूंछ का जख्म नहीं भर सका, चार महीने की जंग हार गई जेरी, पिंजड़े के गेट से हुई थी घायल

Sat, 01 Aug 2026 08:46 PM IST
Shikha Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

बिजनौर से रेस्क्यू करके वर्ष 2019 में कानपुर प्राणि उद्यान लाई गई थी। अप्रैल में पिजड़े के गेट में पूंछ दबने से घायल हुई थी। 
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मादा तेंदुआ की मौत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कभी डॉक्टरों के हाथों से दूध पीकर बड़ी हुई ''जेरी'' आखिर जिंदगी की जंग हार गई। बिजनौर से रेस्क्यू कर वर्ष 2019 में कानपुर प्राणि उद्यान लाई गई मादा तेंदुआ चार महीने पहले पिंजड़ा बदलने के दौरान हुए एक हादसे का दर्द नहीं सह सकी। पूंछ में लगी चोट धीरे-धीरे गहरे जख्म में बदल गई, संक्रमण पूरे शरीर में फैल गया और शनिवार को उसने अंतिम सांस ले ली। उसकी मौत से प्राणि उद्यान के कर्मचारियों और चिकित्सकों में भी मायूसी छा गई।
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बिजनौर के जंगल में रेस्क्यू के दौरान एक साथ करीब तीन छोटे बच्चे मिले थे। जिसमें एक जेरी भी शामिल थी। प्राणि उद्यान के पशु चिकित्सकों और कर्मचारियों ने उसकी विशेष देखभाल की। उसे हाथों से दूध पिलाकर बड़ा किया गया। हालांकि उम्र बढ़ने के साथ उसका स्वभाव काफी आक्रामक हो गया। सुरक्षा कारणों से उसे अलग बाड़े में रखा जाता था।
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अप्रैल 2026 में उसे एक बाड़े से दूसरे बाड़े में शिफ्ट किया जा रहा था। इसी दौरान उसकी पूंछ दरवाजे में दब गई और वह गंभीर रूप से घायल हो गई। हादसे के तुरंत बाद उसे प्राणि उद्यान के अस्पताल में भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। पशु चिकित्सकों की टीम लगातार उसकी निगरानी करती रही। इलाज के दौरान सबसे बड़ी मुश्किल यह रही कि जेरी बार-बार अपनी घायल पूंछ को मुंह से काटती और नोचती रही।

इससे घाव भरने के बजाय लगातार गहराता चला गया। धीरे-धीरे संक्रमण बढ़कर सेप्टीसीमिया में बदल गया। पिछले करीब एक महीने से उसने भोजन भी लगभग छोड़ दिया था, तीन दिन से बिल्कुल नहीं खाया। जिससे उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई।
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करीब चार महीने तक चले इलाज और चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद शनिवार को जेरी की मौत हो गई। मृत्यु के बाद तीन पशु चिकित्सकों के पैनल ने उसका पोस्टमार्टम किया, जिसके बाद नियमानुसार शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

रेस्क्यू के दौरान उसे कानपुर जू लाया गया था। यहां के डॉक्टरों ने उसकी देखभाल कर उसे पाला था। पूछ में चोंट लगी थी उसे वह खुद ही अपने मूंह से नोचती रहती थी जिस कारण घाव गंभीर हो गया था। उसके शव को पोस्मार्टम कर दफना दिया गया। - फिरोज खान, चिड़ियाघर रेंजर

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