अप्रैल 2026 में उसे एक बाड़े से दूसरे बाड़े में शिफ्ट किया जा रहा था। इसी दौरान उसकी पूंछ दरवाजे में दब गई और वह गंभीर रूप से घायल हो गई। हादसे के तुरंत बाद उसे प्राणि उद्यान के अस्पताल में भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। पशु चिकित्सकों की टीम लगातार उसकी निगरानी करती रही। इलाज के दौरान सबसे बड़ी मुश्किल यह रही कि जेरी बार-बार अपनी घायल पूंछ को मुंह से काटती और नोचती रही।
इससे घाव भरने के बजाय लगातार गहराता चला गया। धीरे-धीरे संक्रमण बढ़कर सेप्टीसीमिया में बदल गया। पिछले करीब एक महीने से उसने भोजन भी लगभग छोड़ दिया था, तीन दिन से बिल्कुल नहीं खाया। जिससे उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई।
करीब चार महीने तक चले इलाज और चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद शनिवार को जेरी की मौत हो गई। मृत्यु के बाद तीन पशु चिकित्सकों के पैनल ने उसका पोस्टमार्टम किया, जिसके बाद नियमानुसार शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
रेस्क्यू के दौरान उसे कानपुर जू लाया गया था। यहां के डॉक्टरों ने उसकी देखभाल कर उसे पाला था। पूछ में चोंट लगी थी उसे वह खुद ही अपने मूंह से नोचती रहती थी जिस कारण घाव गंभीर हो गया था। उसके शव को पोस्मार्टम कर दफना दिया गया। - फिरोज खान, चिड़ियाघर रेंजर