हिमालयन गिद्धों को कानपुर चिड़ियाघर में रखने की कवायद शुरू कर दी गई है। फर्रूखाबाद जिले के कायमगंज से लाए गए हिमालयन गिद्ध को डॉक्टर मादा और ईदगाह में मिले गिद्ध को नर मान रहे हैं। अब उनके वंश को बढ़ाने का विचार किया जा रहा है। हालांकि प्रशासन इससे पहले इनकी पहचान के लिए दोनों के सैंपल बरेली स्थित आईवीआरआई प्रयोगशाला भेजकर जांच कराएगा।
इसके बाद इन्हें एक ही बाड़े में रखा जाएगा। एक सप्ताह पहले ईदगाह में पकड़ा गया हिमालयन गिद्ध अब स्वस्थ होने लगा है। अब वह डर से बाहर आ गया है। डॉक्टरों ने उसे अब तनावमुक्त बताया है। वहीं, सोमवार को कायमगंज से लाए गए गिद्ध को मादा बताया जा रहा है। दोनों को अगल-बगल वाले कटघरे में रखा गया है।
डॉ. अनुराग ने बताया कि भीड़ में फंसने के कारण ये गिद्ध सहमा हुआ है। हालांकि उसके स्वास्थ्य की जांच की गई तो कमी नहीं मिली है। उसका स्लेटी रंग है और चोंच सफेद है। वजन करीब सात किलो है। उससे अंदाजा लगाया जा रहा कि मादा है। दोनों मांस खा रहे हैं।
हिमालयन गिद्ध की विशेषताएं
हिमालयन गिद्ध सात से बारह किलो वजन तक का होता है। इसके अलावा पंख फैलाने पर उसकी चौड़ाई तीन मीटर तक हो जाती है। यह गिद्ध पहाड़ी क्षेत्रों में 1200 से 5500 मीटर की ऊंचाई पर भारत से लेकर पाकिस्तान, कजाकिस्तान, उज्बेगिस्तान, तजाकिस्तान, ईरान, नेपाल, भूटान व तिब्बत तक पाए जाते हैं। ये गिद्ध एक दिन में एक से डेढ़ किलो मांस खा सकता है।