अभी तक नहीं पता चला वैज्ञानिक कारण
मानसून आने के कुछ समय पहले ही मंदिर के पत्थरों से पानी की बूंदें क्यों टपकती हैं, इसका वैज्ञानिक कारण अभी तक कोई नहीं बता पाया है। इससे पहले यहां कई तकनीकी संस्थाओं के विशेषज्ञों की टीम भी आकर अध्ययन कर चुकी है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर के पास से होकर पूर्व में सरस्वती नदी का बहाव होता था।
जैसे ही बारिश शुरू होगी, बूंदें टपकना बंद हो जाएंगी
इसके अलावा पानी का दूसरा कोई स्रोत आसपास नहीं है। डॉ. पांडेय ने बताया कि इस बार मंदिर से बूंदें उसी समय टपकना शुरू हो गईं थी, जिस दिन केरल में मानसून की दस्तक हुई थी। जैसे जैसे मानसून आगे बढ़ रहा है बूंदें अधिक होती जा रही हैं। उन्होंने बताया कि जैसे ही बारिश शुरू होगी, यह बूंदें टपकना बंद हो जाएंगी।