बर्फबारी से शीतलहर का प्रकोप बढ़ेगा
अधिकतम तापमान 24.7 डिग्री सेल्सियस रहा। इसी तरह अधिकतम नमी 80 फीसदी और न्यूनतम 37 नमी डिग्री सेल्सियस रही। सीएसए मौसम विभाग के तकनीकी अधिकारी अजय मिश्रा ने बताया कि सात दिसंबर को बदली होगी, जो आठ दिसंबर और उसके बाद हल्की होती जाएगी। उत्तर पश्चिमी हवाओं और हिमालय में हो रही बर्फबारी से शीतलहर का प्रकोप बढ़ेगा।
क्षेत्रों में तापमान में भारी गिरावट आती है
वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डॉ. एसएन सुनील पांडेय ने बताया कि पोलर वोर्टेक्स के कमजोर होने से कई महत्वपूर्ण मौसमी परिवर्तन होते हैं, जिनमें मुख्य रूप से भयंकर ठंड की लहरें और अत्यधिक मौसम की घटनाएं शामिल हैं। जेट स्ट्रीम में इस बदलाव के कारण, आर्कटिक क्षेत्र की बेहद ठंडी हवा एशिया जैसे मध्य अक्षांशीय क्षेत्रों में गहराई तक प्रवेश कर जाती है। इस ठंडी हवा के दक्षिण की ओर बहने से इन क्षेत्रों में तापमान में भारी गिरावट आती है, जिससे अत्यधिक ठंड, भयंकर बर्फीले तूफान और पाला पड़ने जैसी चरम मौसमी घटनाएं होती हैं।
अगले दिनों में कड़ाके की ठंड पढ़ने की पूरी संभावना
डॉ. पांडेय के अनुसार आज रात के तापमान में वृद्धि हो सकती है क्योंकि शाम से ऊंचे बादलों की आवाजाही शुरू हुई, जो रात में भी जारी रही। एक पश्चिमी विक्षोभ भी पहाड़ों पर आया, जिसके कारण ऊंची पहाड़ियों पर बर्फबारी हुई है। बर्फबारी के बाद उत्तर पश्चिमी सर्द हवाएं इन बर्फबारी से होकर गंगा के मैदानी भागों में आना शुरू हुई हैं। तापमानों में उतार चढ़ाव के बावजूद अगले दिनों में कड़ाके की ठंड पढ़ने की पूरी संभावना मौसमी मॉडल दिखा रहे हैं।
बीमारी के बच्चे ओपीडी में आने शुरू
तापमान में गिरावट का असर बच्चों और नवजातो पर पड़ता है। इसलिए इस मौसम में नवजातों को मां सीने से चिपकाएं और बड़े बच्चों को घर से बाहर न निकलने दें। यह जानकारी हैलट के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. यशवंत राव ने दी। उन्होंने बताया कि ऐसे मौसम में ब्रोंकोलाइटिस की समस्या वाले बच्चों में फेफड़ों में संक्रमण हो जाता है। इस तरह की बीमारी के बच्चे ओपीडी में आने शुरू हो गए हैं। 100 की ओपीडी में इनकी संख्या आठ से दस है। सर्दी बढ़ने पर यह संख्या और बढ़ती जाती है। इसलिए नवजातों की कंगारू मदर केयर की तरह देखभाल करें। उन्होंने बताया कि बच्चों को गरम कपड़े पहनाएं। उन्हें कमरे में बंद रखें, लेकिन कमरे में हीटर न जलाएं। गर्म खाना खाएं। मोजे और दास्ताने पहनाने के साथ कान ढकना बेहद जरूरी है।