ओटी में कबूतरों और चूहों का कब्जा
आरोप है कि उसी समय जब इसके लिए उपकरणों की खरीद फरोख्त हुई थी, तो उसमें भी काफी धांधली की गई थी। दो लाख का अगर एक उपकरण है तो उसे चार लाख का बताया गया। उपकरणों का मेंटीनेंस न होने व तारों की खराबी के चलते वह शुरू नहीं हो सकी। ओटी में कबूतरों और चूहों का कब्जा हो गया। अब इंजीनियर ने भी मना कर दिया। उनका कहना है कि अब इसका संचालन नहीं हो सकता है।
एसी के लिए लगने वाला सिस्टम बर्बाद
अब इंजीनियरों की रिपोर्ट के अनुसार, उर्सला अस्पताल की इस ओटी की स्थिति इतनी खराब है कि सर्जरी किया जाना संभव नहीं है। एसी के लिए लगने वाला सिस्टम बर्बाद हो गया है। निदेशक डॉ. एचडी अग्रवाल ने बताया कि वर्तमान में अस्पताल में चार ओटी संचालित हैं जिसमें हड्डी, नाक-कान-गला, नेत्र और सामान्य मिलाकर औसत 30 सर्जरी रोजाना हो रही हैं। अगर मॉड्यूलर ओटी शुरू हो जाती, तो सर्जरी की संख्या बढ़ने के साथ ही रोगियों में संक्रमण की आशंका भी न के बराबर होती।
लैप्रोस्कोपिक व इंडोस्कोपी मशीनें दूसरे कमरे में रख दी गई
मॉड्यूलर ओटी में ऑपरेशन टेबल, सर्जिकल लाइट, एनेस्थीसिया मशीन, मरीज मॉनिटर, उच्च दक्षता कणिकीय वायु (हेपा) फिल्टर, मेडिकल गैस पैनल जैसे कई महत्वपूर्ण उपकरण लगाए गए थे। इस ओटी में इंटरकॉम की व्यवस्था भी थी जिससे ओटी के अंदर वाले लोगों को अगर बाहर से कुछ मंगाना हो तो वह फोन कर भी मंगा सकते थे। हेपा फिल्टर भी लगा था जो छोटे से छोटे बैक्टीरिया को अपने में चिपका लेता और रोगी को संक्रमण से बचा सकता है। सन 2010 में अस्पताल में लैप्रोस्कोपिक व इंडोस्कोपी मशीनें भी आई थीं। कुछ समय के लिए यह मशीनें तो सामान्य ओटी में प्रयोग हुईं भी थीं। ये मशीनें ओटी से हटाकर दूसरे कमरे में रख दी गई हैं।
हमने ओटी का निरीक्षण इंजीनियर व तकनीकी विशेषज्ञों से है। उनका कहना है कि उसकी हालत काफी खराब है। इसे शुरू नहीं किया जा सकता है। बाकी हमारे यहां चार ओटी सुचारू रूप से संचालित हैं और रोगियों को निर्बाध रूप से सेवाएं दी जा रही हैं। -डॉ. एच डी अग्रवाल, निदेशक उर्सला