जघन्य अपराध करने वालों में अपराध का बीज बचपन से पड़ता है। उनमें शुरू से जिद करने, नियम तोड़ने, अकड़बाजी आदि बिगड़ैल स्वभाव के लक्षण होते हैं। कुछ लोगों में कम काबिलियत होने पर बड़े सपने पालने का शौक, वैयक्तिक विघटन कर देता है। गलत तरीके, बड़े सपने पूरा करने के लिए आसान रास्ता नजर आते हैं।
मनोरोग विशेषज्ञों का कहना है कि गलत काम करने की मानसिकता डोपामीन हार्मोंस के रिसाव से जुड़ जाती है। फिर ऐसे काम करने में मजा आने लगता है। जघन्य अपराध के बाद होने वालीं चर्चाएं और हंगामे अपराधी को मजा देते हैं।
मनोरोग विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे व्यक्ति भले ही बर्ताव में सामान्य लगते हैं लेकिन अंदर से हमेशा खतरनाक होते हैं। ऐसे लोग शातिर प्लानिंग भी कर लेते हैं। गलत काम करते ही उनकी मनोदशा बदल जाती है। कई बार सोच-समझकर अपराध की तरफ उन्मुख होते हैं तो कई बार परिस्थितियों के कारण।
किसी की जिंदगी में बड़ा सदमा भी बिगड़ने का कारण बनता है। एक शांत दिखने वाला अपराधी होता है जो घटित चीजों को मन में स्टोर करके बैठ जाता है और उपयुक्त मौके की तलाश में रहता है वहीं दूसरा बड़बोला, हर मौके पर हनक दिखाने वाला होता है।
विशेषज्ञ इसे कॉन्डक्ट डिस्ऑर्डर और अपोजीशनल डिफाएंट डिस्ऑर्डर कहते हैं। उनका कहना है कि बिगड़ैैल स्वभाव के कारण ये झगड़ालू हो जाते हैं। नशे के भी आदी हो जाते हैं। बहुत से ऐसे अपराधियों को पावर का नशा हो जाता है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. गणेश शंकर का कहना है कि बचपन में कॉन्डक्ट डिस्ऑर्डर सरीखे लक्षणों के आधार पर इन्हें पहचाना जा सकता है। वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. विपुल सिंह का कहना है कि पर्सनालिटी डिस्ऑर्डर होने पर व्यक्ति एंटी सोशल हरकत कर सकता है।