क्षेत्र के बिरहर गांव में लोगों को हैरत उस समय हुई जब दो दिन पहले कुएं में गिरे अपने बच्चे को बचाने के लिए बिल्ली मेहनत करती रही। जब नहीं निकाल पाई तो मालिक की बेटी को इशारा करके दूसरे मोहल्ले में स्थित कुएं तक ले आई।
ममता एक भाव है। उसे किसी बोली की दरकार नहीं। बस उस पुकार को सुनने और समझने के लिए मन में करुणा लाजिम है। इनसान और जानवर का लंबे समय से सहअस्तित्व इसका प्रमाण है। और ऐसे उदाहरण आए दिन सामने आते रहते हैं। ऐसा ही एक मामला कानपुर से...
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क्षेत्र के बिरहर गांव में लोगों को हैरत उस समय हुई जब दो दिन पहले कुएं में गिरे अपने बच्चे को बचाने के लिए बिल्ली मेहनत करती रही। जब नहीं निकाल पाई तो मालिक की बेटी को इशारा करके दूसरे मोहल्ले में स्थित कुएं तक ले आई।
इसके बाद जब बिल्ली की हरकत को देखा गया तो कुएं में झांकने पर बच्चे की धीमी आवाज सुनाई पड़ने लगी। फिर रस्सी में झोला बांधकर बच्चे को बाहर निकाल लिया गया। इसके बाद बिल्ली का बच्चे से दुलार देख लोग दंग रह गए।
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बिरहर गांव निवासी सुजीत अवस्थी के घर में एक बिल्ली और उसके दो बच्चे घर के सदस्य की तरह रहते हैं। सुजीत की बेटी जयंती से वह अधिक घुली मिली है। बच्चे अपनी मां के साथ गांव के दूसरे मोहल्लों के घरों में आते जाते रहते हैं। दो दिन पूर्व एक घर में बने कुएं में एक बच्चा गिर गया।
बच्चे को निकालने की जुगत में लगी दूसरे बच्चे के साथ कुएं के आसपास ही बनी रही और घर नहीं गई। दो दिन बीत जाने पर भी बच्चा कुएं में फंसा रहा तो बिल्ली दूसरे बच्चे को लेकर घर पहुंची।
बेटी ने उसके साथ एक ही बच्चे को देखा तो परेशान हो गई। उसे लगा कि कहीं कुत्तों ने तो उसे शिकार नहीं बना डाला। इसी दौरान बिल्ली बेटी के पैरों के पास लोटने लगी। इस पर जब बेटी ने जानना चाहा तो उसे आगे आगे चलकर कुएं तक ले गई और झांकने लगी। जब बेटी ने झांककर बच्चे को पुकारा तो नीचे से उसकी भी आवाज आई।
बच्चे के कुएं में होने पर रस्सी में झोला बांधकर जैसे ही डाला गया तो बच्चा उसमें बैठ गया। इसके बाद उसे बाहर निकाल लिया गया। तब बिल्ली की जान में जान आई। बिल्ली की समझदारी को लेकर वहां मौजूद लोग आश्चर्य में पड़ गए। साथ ही मां की ममता का बखान करते रहे।