कानपुर में साइबर ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे में ट्रांसफर कराने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड राजबीर सिंह यादव के पांच खातों में 2.12 करोड़ रुपये मिले हैं, जिसे सोमवार को पुलिस ने फ्रीज करा दिया। उसके व रिश्तेदारों के नाम पर कुल 13 खाते थे। पुलिस ने जांच के आधार पर 13 खातों समेत कुल 53 संदिग्ध बैंक अकाउंट फ्रीज कराए हैं। सभी खाते सीबीएस बैंक में खुले थे। पुलिस मंगलवार को अन्य बैंकों में जाकर जानकारी हासिल करेगी।
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि बर्रा पुलिस ने चार दिन पहले बैंक अधिकारियों, स्टाफ और अन्य को मिलाकर आठ लोगों को जेल भेजा था। जांच में बर्रा आठ के राजबीर सिंह यादव और आगरा के अंचित अग्रवाल का नाम सामने आया है। यह लोगों के म्यूल अकाउंट खुलवाकर उसे साइबर अपराधियों को दे रहे थे। उसकी रकम को दूसरी, तीसरी, चौथी और पांचवीं लेयर तक पहुंचाने का कार्य कर रहे थे।
कुल 53 बैंक खातों को फ्रीज कराया गया
राजबीर सिंह स्वयं पहले बर्रा में खुली फिनो बैंक में लोन दिलाने का कार्य कर रहा था। पुलिस को उसके सीबीएस बैंक में खाते होने की जानकारी हुई। उसके व रिश्तेदारों के नाम पर 13 बैंक खाताें की जानकारी हुई। पांच बैंक खातों में 2.12 करोड़ रुपये थे। सभी को फ्रीज करा दिया गया है। पुलिस की जांच में 40 अन्य संदिग्ध खाते मिले थे। कुल 53 बैंक खातों को फ्रीज कराया गया है।
300 से अधिक संदिग्ध खातों की हो रही जांच
डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि आरोपियों की जानकारी करने पर 300 से अधिक संदिग्ध बैंक खाते मिले हैं। इनको म्यूल अकाउंट की तरह से इस्तेमाल किया जा रहा था। साइबर ठगी, डिजिटल अरेस्ट और फर्जी फर्म के रुपये मंगवाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाने की आशंका है। पुलिस सभी 300 खातों की जांच कर रही है।
आगरा की बैंकों से मांगी गई जानकारी
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आगरा की बैंकों से अंचित अग्रवाल के बैंक अकाउंट और अन्य जमा पूंजी की डिटेल मांगी गई है। उसका कानपुर कनेक्शन भी खंगाला जा रहा है। अंचित अग्रवाल के चालक के खाते में 50 करोड़ से अधिक का ट्रांजेक्शन मिला है।
दो हजार से चार हजार लेनदेन वाले खाते मिले
बर्रा इंस्पेक्टर रवींद्र श्रीवास्तव ने बताया कि आरोपियों के पास से दो से चार हजार की लेनदेन वाले कई खाते मिले हैं। इनका उपयोग बैंक खातों की लेयर बनाने और उनको तोड़ने के लिए होने की संभावना है। ऐसा करने से बैंक खातों की चेन टूट जाती है। पुलिस और जांच करने वाली टीमें छोटी राशि के ट्रांजेक्शन को देखकर अचंभित हो जाती है जिसका असर जांच पर पड़ता है।