उत्तर भारत के एकमात्र शिवाला स्थित दशानन मंदिर के पट दशहरा के दिन गुरुवार सुबह छह बजे खुलेंगे। मंदिर के साल में एक ही बार पट खोले जाते हैं। दशहरा के दिन दूरदराज से लोग दशानन के दर्शन करने आते हैं। मंदिर की देखभाल करने वाले चंदन मौर्य ने बताया कि कैलाश मंदिर में ही दशानन मंदिर बना है। करीब 157 साल पहले 1868 में मंदिर का निर्माण उस समय राजा रहे गुरु प्रसाद शुक्ला ने कराया था।
मान्यताओं के अनुसार शिवाला में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास है। यहां भगवान शिव, छिंदमस्तिका, प्रभु श्रीराम आदि भगवान विराजमान हैं। पुराने समय में इन देवी-देवताओं की पहरेदारी के लिए किसे स्थापित किया जाए, इस पर चर्चा हुई तो तय हुआ कि सबसे बुद्धिमान दशानन का मंदिर भी यहां बनाया जाए। दशानन का जन्म और मृत्यु एक ही दिन हुई थी इसलिए साल में सिर्फ एक बार दशहरा के दिन सुबह यह मंदिर खोला जाता है। सबसे पहले साफ-सफाई कर दशानन का अभिषेक किया जाता है। इसके बाद सरसों के तेल का दीपक जलाकर दशानन का जन्मदिवस मनाया जाता है। दिनभर भक्तों की भीड़ लगी रहती है। रात 8:30 बजे रावण का वध होते ही मंदिर के पट फिर बंद कर दिए जाते हैं और इसके बाद अगले साल ही दशहरा के दिन खोले जाते हैं।