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Kanpur: इस्राइल-ईरान के बीच तनातनी खत्म, शहर से निर्यात शुरू…तनाव बढ़ने पर रोक दिए गए थे 100 करोड़ के आर्डर

Wed, 02 Jul 2025 04:39 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: कारोबारियों का कहना है कि ईरान में युद्ध के चलते कई विदेशी खरीदारों से फोन पर संपर्क नहीं हो पा रहा था। अब उनसे संपर्क होने लगा है, लेकिन युद्ध के कारण शिपिंग की लागत और समय सीमा बढ़ गई है।
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जाजमऊ लेदर इंडस्ट्रीज - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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इस्राइल-ईरान के बीच हुए युद्ध के बाद अब वहां धीरे-धीरे हालात सामान्य हो रहे हैं। तनाव कम होने का असर भी दिखने लगा है। शहर से इस्राइल को निर्यात शुरू हो गया है। वहीं, ईरान में जिन कारोबारियों से संपर्क टूट गया था। वो बहाल होने लगे हैं। कारोबारी बातचीत भी शुरू हो गई है। दोनों देशों के बीच युद्ध और अमेरिका की ओर से ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले से तनाव चरम पर पहुंच गया था। इससे शहर के निर्यातकों ने करीब 100 करोड़ के निर्यात ऑर्डर रोक दिए थे।

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इस्राइल को शहर से चमड़ा उत्पाद, मशीनरी, डायमंड पॉलिश, सेफ्टी शूज और ईरान को अलग-अलग प्रकार के चारा फूड सप्लीमेंट और चमड़ा उत्पादों का निर्यात किया जाता है। इस्राइल चमड़े के बेल्ट का बड़ा बाजार है। युद्ध के चलते बीमा रकम बढ़ने के साथ ही शिपिंग कंपनियों ने मालभाड़ा भी 20 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। जानकारों का कहना है कि युद्ध से निर्यात मार्ग बदल गया है। हवाई क्षेत्र बंद होने से मध्य एशिया के देशों में समुद्र मार्ग से जाना होगा।

शिपिंग की लागत और समय सीमा बढ़ी
इससे निर्यात लागत बढ़ गई है। लाल सागर में हूती विद्रोहियों का संकट पहले से ही है। कानपुर से इस्राइल को सालाना 500 करोड़ और ईरान को 200 करोड़ के उत्पाद निर्यात किए जाते हैं। वहीं, ईरान से खजूर व अलग-अलग मेवा आते हैं। कारोबारी गतिविधियां रूकने से पिस्ता और खजूर के भाव बढ़ गए थे। हालांकि अभी भी भाव सामान्य नहीं हुए हैं। चर्म निर्यात परिषद के क्षेत्रीय अध्यक्ष असद इराकी ने बताया कि ईरान में युद्ध के चलते कई विदेशी खरीदारों से फोन पर संपर्क नहीं हो पा रहा था। अब उनसे संपर्क होने लगा है, लेकिन युद्ध के कारण शिपिंग की लागत और समय सीमा बढ़ गई है।
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महंगे मार्गों को अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गनाइजेशन फियो के संयोजक आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि दोनों देशों के बीच तनाव कम हुआ है, जिसके चलते निर्यात के रूके आर्डर फिर से जाने लगे हैं। हालांकि अभी इस्राइल में ही कारोबारी गतिविधियां कुछ बढ़ी हैं, लेकिन माल की लागत बढ़ गई है। पश्चिमी बाजारों में कार्गो शिपमेंट के लिए लंबे, अधिक महंगे मार्गों को अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि लाल सागर और स्वेज नहर उच्च जोखिम वाला क्षेत्र माना जाता है।
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