शिपिंग की लागत और समय सीमा बढ़ी
इससे निर्यात लागत बढ़ गई है। लाल सागर में हूती विद्रोहियों का संकट पहले से ही है। कानपुर से इस्राइल को सालाना 500 करोड़ और ईरान को 200 करोड़ के उत्पाद निर्यात किए जाते हैं। वहीं, ईरान से खजूर व अलग-अलग मेवा आते हैं। कारोबारी गतिविधियां रूकने से पिस्ता और खजूर के भाव बढ़ गए थे। हालांकि अभी भी भाव सामान्य नहीं हुए हैं। चर्म निर्यात परिषद के क्षेत्रीय अध्यक्ष असद इराकी ने बताया कि ईरान में युद्ध के चलते कई विदेशी खरीदारों से फोन पर संपर्क नहीं हो पा रहा था। अब उनसे संपर्क होने लगा है, लेकिन युद्ध के कारण शिपिंग की लागत और समय सीमा बढ़ गई है।
महंगे मार्गों को अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गनाइजेशन फियो के संयोजक आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि दोनों देशों के बीच तनाव कम हुआ है, जिसके चलते निर्यात के रूके आर्डर फिर से जाने लगे हैं। हालांकि अभी इस्राइल में ही कारोबारी गतिविधियां कुछ बढ़ी हैं, लेकिन माल की लागत बढ़ गई है। पश्चिमी बाजारों में कार्गो शिपमेंट के लिए लंबे, अधिक महंगे मार्गों को अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि लाल सागर और स्वेज नहर उच्च जोखिम वाला क्षेत्र माना जाता है।